ट्रैफिक पुलिस कर रही कार्रवाई:5 हजार से ज्यादा बाइकर कान फोड़ू, पटाखे की आवाज वाले सायलेंसर लगाकर घूम रहे

राजधानी की सड़कों पर कानफोड़ू और पटाखे की आवाज वाले सायलेंसर लगी लगभग 5 हजार बाइक दौड़ रही है। ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग स्तर पर सर्वे के जरिये ये आंकड़ा निकाला है। शहर में बाइकर्स के दर्जनों ऐसे ग्रुप हैं जो कानफोड़ू सायलेंसर लगाकर दोपहर 4 बजे के बाद घर निकलते हैं। नगर घड़ी से शंकरनगर चौक, वीआईपी रोड होते हुए वे लाभांडी रोड, नवा रायपुर, देवेंद्रनगर, एक्सप्रेस-वे, मंदिरहसौद रोड निकल जाते हैं। देर शाम उसी रुट से लौटते हैं। रविवि की ओर जाने वाली सड़कों पर भी ऐसे सायलेंसर वाली गाड़ियों का ग्रुप घूमता है। ऐसे सायलेंसर वाले बाइकर्स पर अब लगातार कार्रवाई करने के साथ इनकी बिक्री करने वाली दुकानों को सील भी किया जाएगा। हालांकि पुलिस अभी तक अभियान के दौरान ही ऐसी गा​ड़ियों पर कार्रवाई करती है। बाकी समय इनकी ओर ध्यान नहीं दिया जाता। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर डा. गौरव सिंह और एसएसपी डा. लाल उमेद सिंह ने अफसरों से अब ऐसे सायलेंसर वाले बाइक चालकों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस की टीम इन बाइकर्स के निर्धारित रुट में इनके निकलने के समय में तैनात रहेगी। ऐसे बाइकर्स को रोककर सीधे कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की जांच में भी ये प्रमाणित हुआ है कि इस तरह के सायलेंसर वाहन चलते समय 85 से 120 डेसिबल तक का शोर करते हैं। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए ऐसे सायलेंसर वाली गाड़ियों नुकसानदायक है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता क का कहना है कि इस तरह का शोर यदि लगातार होता रहे तो कान की नसें तक डेमेज हो सकती हैं। शहर में बिक रहे ऐसे सायलेंसर : शहर के कुछ ऑटो पार्ट्स की दुकानों में कई तरह के सायलेंसर बिक रहे हैं। इसमें पंजाबी सायलेंसर सबसे कर्कश आवाज वाला होता है। इसके अलावा डॉल्फिन बूस्टर, डबल बैरल बूस्टर, शार्क नाम से भी सायलेंसर बिक रहे हैं। बुलेट वाले सायलेंसर की आवाज अलग ही होती है। इससे थोड़ी-थोड़ी देर में गोली या पटाखे फूटने जैसी आवाज आती है। गा​ड़ियों में कंपनी के सायलेंसर लगकर आते हैं बाइकर्स उसे निकलवाकर अपनी पसंद के सायलेंसर लगवा रहे हैं। पंजाबी, मिनी पंजाबी, लांग पंजाबी और शॉर्ट पंजाबी सायलेंसर युवाओं की पहली पसंद है। पंजाबी सिलेंडर सबसे ज्यादा शोर करने वाले हैं। पटाखे की आवाज भी इसी तरह के सायलेंसर से निकलती है। चलती बाइक में स्टंट करने के लिए कई बाइकर्स इन सायलेंसर से ही पटाखों की आवाज करते हैं। डब्ल्यूएचओ ने भी माना खतरनाक डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भी कई बार दावा किया गया है कि 85 से 90 डेसिबल का शोर हाईली डेंजरस है। तेज आवाज यदि अचानक सुनी जाए तो नर्व डेमेज का खतरा बढ़ जाता है। इससे सुनने की शक्ति भी जा सकती है। एक बार सुनने की क्षमता जाने के बाद दुबारा आना लगभग मुश्किल रहता है। 60 डेसीबल से ज्यादा शोर है तो कान के लिए नुकसानदायक है। इससे चिड़चिड़ापन, घबराहट, काम पर ध्यान नहीं लगना जैसी शिकायतें भी बढ़ जाती है। किसी भी तरह की तेज या कर्कश आवाज से शरीर को असंतुलित होती है। शरीर पर दबाव का केंद्र बनता है, ऐसे में डायबिटिक, ब्लडप्रेशर और हार्ट पेशेंट्स के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है। तेज आवाज के सायलेंसर वाली गा​ड़ियों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जो दुकानदार इसकी बिक्री कर रहे हैं उन पर जुर्माना लगाने के साथ ही दुकान सील की जाएगी।
डॉ. गौरव कुमार सिंह, कलेक्टर

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