छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के 65 यात्री कश्मीर ट्रिप पर गए थे। पहलगाम हमले के बाद वो वहां फंसे हुए हैं। रायपुर से पत्रकार रामअवतार तिवारी और शशांक तिवारी भी इनमें शामिल हैं। दोनों ने दैनिक भास्कर को फोन पर बताया कि परिवार सुरक्षित होटल में है। मगर घटना से कुछ ही घंटे के बाद हम भी पहलगाम ही जा रहे थे। रास्ते में फोर्स ने रोका इसके बाद हम श्रीनगर लौटे। अब श्रीनगर समेत पूरा कश्मीर बंद है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हम से फोन पर बात की हाल-चाल जाना। फिलहाल हम सुरक्षित हैं। प्रदेश के सभी 65 यात्री ट्रैवल एजेंसी की संचालक ममता शर्मा के साथ कश्मीर पहुंचे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने ममता से हाल पूछा। इसके जवाब में ममता ने क्या कहा, उन्हीं की जुबानी पढ़िए… पहलगाम जाते समय आर्मी ने रोका और हमले के बारे में बताया, 7 घंटे फंसे रहने के बाद मिली सुरक्षित जगह: ममता हमारे साथ 8 लोग बिलासपुर से हैं, 10 लोग भिलाई से, बाकी रायपुर के मिलाकर 65 लोग हैं। हम बहुत अच्छे से पूरी ट्रिप कर रहे थे। इसके बाद हमें पहलगाम जाना था। किसी कारण से एक पॉइंट छूटा गया था ट्यूलिप गार्डन वगैरह। हमें सुबह 9:00 बजे चेक आउट करना था, लेकिन लेट हो गए और हम 2:00 बजे तक श्रीनगर में ही रह गए। इसके बाद हम पहलगाम के लिए रवाना हुए। तब तक कोई जानकारी नहीं थी, बीच में जब हमारी गाड़ी को आर्मी वालों ने रोका। हमने पूछा कि कारण क्या है, तो उस समय भी हल्का ही था माहौल। दुकान वालों ने कहा कि ये होता रहता है आर्मी वाले चेक करते हैं। मगर कुछ ही देर में सब बोलने लगे कि पर्यटकों को मार दिया गया है। हम ये सुनकर दंग रह गए। गाड़ियों का लम्बा जाम लगने लगा। काले पकड़े पहने, हाथों में बंदूकें लिए जवानों का मूवमेंट तो हो गया था। गाड़ी आगे नहीं जाएगी कह रहे थे जवान, कोई कुछ स्पष्ट नहीं बता रहा था। अटैक हो गया अटैक हो गया, हर कोई यही कहते हुए श्रीनगर की तरफ जा रहा था। एक-एक कर एंबुलेंस आने लगीं। कुछ समझ नहीं आ रहा था। गाड़ी के ड्राइवर्स ने आगे बात तो पता चला कुछ लोगों को आतंकियों ने गोली मार दी है। हमारे साथ 3 साल के बच्चे से लेकर 65-70 साल के बुजुर्ग थे। जवान बार-बार कह रहे थे आगे नहीं जाएगा कोई। यदि हम अपने टाइम पर पहलगाम गए होते तो आज हमारी स्थिति कुछ और होती। शाम तक स्थिति इतनी खराब हो गई कि फोर्स वाले एक ही लाइन बोल रहे थे कि जहां खड़े हो वहीं खड़े रहो ना आगे जाना है ना ही पीछे। हम गाड़ी में ही बैठे रहे। आगे पहलगाम में होटल में 20 से ज्यादा हमारे कमरे बुक थे। हम होटल छोड़कर आ चुके थे। मंगलवार को हम दोपहर से लेकर देर रात तक करीब 6 से 7 घंटे फंसे रहे। दूसरे होटलों में बात कर रहे थे तो सभी जगह फुल हो चुके थे। हमने 2 महीने पहले सारी बुकिंग्स की थी। सब बिगड़ता जा रहा था। सैकड़ों फोन कॉल्स हम कर रहे थे। कभी कोई बुलेट प्रूफ आर्मी व्हीकल हमें पीछे छोड़कर तेजी से आगे जा रही थी। डरे सहमे लोगों से भी गाड़ियों के लिए रास्ता क्लियर करते जवान उन्हें श्रीनगर की ओर जाने को कह रहे थे। श्रीनगर में हम तीन दिन जिस होटल में थे वहां बात हुई। लंबे प्रयास के बाद हमारे लिए 22 रूम मैनेज हुए। अब हम वहीं हैं और सुरक्षित हैं। हमारी स्थिति को देखकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने कहा है कि आपका घर है, आप यहां रहिए। ऐसे दहशत भरे माहौल में हम उनकी दरियादिली कभी भूल नहीं पाएंगे। स्थानीय लोगों ने काफी मदद की। बुधवार को सुबह हुई तो हम कोशिश कर रहे थे की रास्ता खुल जाए और हम अर्ली मॉर्निंग वहां से निकल जाएं। आर्मी के कुछ लोगों ने बताया कि श्रीनगर में अब ज्यादा दिन रुकना सेफ नहीं है। लेकिन प्रॉब्लम ये है कि रोड ब्लॉक है। रामबन रोड में लैंड स्लाइड हुई है, सुरक्षागत कारणों से सड़कें भी बंद हैं। कब तक हम यहां से निकलेंगे यह हमें समझ में नहीं आ रहा है, कटरा तक कैसे जाएं जम्मू तक कैसे जाएं या घर तक कैसे जाएं इसकी व्यवस्था के लिए हमारे साथ जितने लोग हैं सभी आपस में बात कर रहे हैं सोच रहे हैं… फिलहाल तो कुछ समझ नहीं आ रहा है।’


