ठंडी हवा, गजक-रेवड़ी से असहनीय दर्द के साथ क्लीनिक पहुंच रहे मरीज

सर्दियों का मौसम आते ही दांतों की सेंसिटिविटी अचानक हाइपर हो जाती है, जो सेंसिटिविटी बाकी मौसम में मामूली रहती है, वह ठंड में तापमान के बदलाव पर भी तेज दर्द में बदल रही है। ठंडी हवा का झोंका, ठंडा पानी, मीठा या गजक-रेवड़ी जैसे स्टिकी फूड दांतों के लिए बड़ा ट्रिगर बन रहे हैं। डेंटल क्लीनिक्स में रोजाना ऐसे 3 से 4 मरीज पहुंच रहे हैं, जो सामान्य जांच के लिए नहीं, बल्कि अचानक उठे तेज दर्द के कारण आते हैं। ऐसे मामलों में रूट कैनाल तक करनी पड़ रही है। सर्दियों में दांतों की ऊपरी परत पहले से कमजोर लोगों में ज्यादा रिएक्टिव हो जाती है, जिन दांतों में पहले से कैविटी है, लेकिन वह तंग नहीं कर रही थी, वही कैविटी इस मौसम में मीठा फंसते ही दर्द का कारण बन जाती है। खासतौर पर गजक, रेवड़ी और दूसरी चिपचिपी मिठाइयां टूटे दांत और कैप या क्राउन वाले दांतों में फंस जाती हैं। सही केयर से टल सकता है दर्द बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। दिन में दो बार ब्रश करना जरूरी है, चाहे सर्दी कितनी भी क्यों न हो। ब्रश कम से कम दो से तीन मिनट तक ठीक से करना चाहिए। गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करने से दांतों में फंसा मीठा साफ हो जाता है और इन्फेक्शन का खतरा कम होता है। हर खाने के बाद भी गुनगुने पानी से कुल्ला करने की आदत डालें। सर्दियों में खानपान बढ़ जाता है, खासकर मीठा ज्यादा खाया जाता है, ऐसे में ओरल हाइजीन की अनदेखी भारी पड़ सकती है। अगर सेंसिटिविटी बढ़ रही है तो उसे नजरअंदाज न करें, समय पर जांच से रूट कैनाल और दांत टूटने जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। डॉ आत्मजीत सिंह, डेंटिस्ट केस 1 : मीठा खाते ही क्रैक हो गई कैप, महिला का हुआ इमरजेंसी ट्रीटमेंट :एक महिला मरीज के दांत में पहले से कैप लगी हुई थी। सर्दियों में रोज गजक और रेवड़ी खाने की आदत थी। एक दिन मीठा चबाते समय कैप में क्रैक आया, जिसमें तेज झनझनाहट और दर्द शुरू हो गया। जांच में कैप टूट चुकी थी और अंदर का दांत एक्सपोज हो गया था। तुरंत कैप हटाकर ट्रीटमेंट शुरू करना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार अगर समय पर इलाज न होता तो इन्फेक्शन जड़ तक पहुंच सकता था। केस 2 : दांत दो फाड़, कैप के बिना बचाव नामुमकिन : एक मरीज का दांत मीठा खाते समय पूरी तरह दो हिस्सों में टूट गया। पहले से दांत कमजोर था, लेकिन कोई दर्द नहीं था। ठंड और स्टिकी फूड के दबाव ने दांत को पूरी तरह क्रैक कर दिया। जितना ज्यादा दांत टूटता है, उतना ही उसे सेफ करना मुश्किल हो जाता है। इस केस में पहले दर्द कंट्रोल किया गया, फिर दांत को बचाने के लिए कैप लगानी पड़ी। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी दांत खोने तक पहुंचा सकती है। केस 3 : मामूली सेंसिटिविटी से सीवियर पेन तक का : एक मरीज को सिर्फ ठंडा लगने पर हल्की झनझनाहट होती थी। उसने इसे सामान्य मानकर अनदेखा किया। सर्दियों में मीठा ज्यादा खाने और ब्रशिंग में लापरवाही से समस्या बढ़ती गई। कुछ ही दिनों में हालत ऐसी हो गई कि ठंडी हवा भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। जांच में नस तक सूजन पाई गई। आखिरकार रूट कैनाल की गई। केस 4 : टूटा दांत, फंसा मीठा और रात भर का दर्द : एक मरीज का दांत पहले से टूटा हुआ था, लेकिन दर्द नहीं था। रात मिठाई खाने के बाद मीठा उसी जगह फंस गया। पूरी रात तेज दर्द रहा और सुबह इमरजेंसी में आना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे केस सर्दियों में तेजी से बढ़ते हैं।

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