दिल्ली में प्रदूषण से हवा जहरीली हो चुकी है और हालात खराब है। इस बीच, छत्तीसगढ़ में भी ठंड बढ़ने के साथ ही हवा में प्रदूषण का स्तर भी गंभीर होता जा रहा है। राजधानी रायपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 83 पहुंच गया है। बिलासपुर में यह 80 के आसपास दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों के मौसम में हवा की गति कम होने और तापमान में गिरावट के कारण महीन कण (प्रदूषक) पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है। वातावरण में ये देर तक बने रहते हैं। अगले दो-तीन दिनों में प्रदेश में अच्छी ठंड पड़ेगी। ऐसी स्थिति में राजधानी सहित प्रदेश के कई हिस्सों में हवा में प्रदूषण बढ़ने का खतरा ज्यादा है। कई जगह शीतलहर चलने के आसार हैं। राजधानी रायपुर में स्थिति खराब है। यहां कई जगहों पर हवा की गुणवत्ता( एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई) 100 से ऊपर है। अस्थमा और सांस से संबंधित बीमारियों वाले लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है। रायपुर के अलावा बिलासपुर में मंगला एनटीपीसी स्टेशन क्षेत्र में भी स्थिति खराब है। भिलाई और कोरबा में भी एक्यूआई 50 से ऊपर है। यह स्थिति सांस की समस्या वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ाती है। ऐसे में इस उम्र के लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत है। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. शम्स परवेज, साइंटिस्ट तथा एसोसिएट प्रोफेसर पं. रविशंकर शुक्ल विवि केमिस्ट्री प्रदूषकों से खून गाढ़ा होने का खतरा छत्तीसगढ़ में इस दिसंबर में एक्यूआई 2023 व 2024 की तुलना में ज्यादा है। 60-65 से बढ़कर 100 से पास होना चिंताजनक है। कोरोना के दौरान हवा में प्रदूषण की मात्रा कम होने का जो फायदा हमें हुआ था, वह अब हम गंवा रहे हैं। रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर में एक्यूआई 50% से नीचे था। ये मानक स्तर के बराबर था और अब बढ़ने लगा है। लोग एक्सरसाइज करते हुए, नाचते हुए गिरते हैं और मौत हो जाती है। इसकी एक बड़ी वजह खून का गाढ़ा होना है। खून के गाढ़ा होने में कार्बन पार्टिकल का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ के पीएम 2.5 में 60% हिस्सा कार्बन का है। ऐसा देश के किसी भी अन्य इलाके में नहीं। छत्तीसगढ़ में 6 करोड़ टन कोयला जलता है। तीन वजहों से प्रदूषण घातक है। पहली-यहां पीएम 2.5 में 60% कार्बन का होना, कोरोना से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना और तीसरा छत्तीसगढ़ में सिलकसेल के मरीजों का अधिक पाया जाना। इसलिए प्रदूषण को नियंत्रित करना होगा। 2022 में राज्य सरकार को ब्लू स्काई के लिए एक प्लान दिया गया है। यह स्वीकृत भी हो गया है। इसे लागू किया जाना चाहिए। इसमें सरकारी संस्थानों में पर्यावरण विशेषज्ञों की नियुक्ति, प्रदूषण निवारण मंडल का दायरा बढ़ाने सहित कई सिफारिशें की गई हैं। प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी इसमें जिम्मेदारी निभानी होगी। प्रदेश में कई जगह पारा सामान्य से 4.5 डिग्री तक कम, दुर्ग में शीतलहर छत्तीसगढ़ में फिर कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। कई जगहों पर शीतलहर चल रही है। राज्य के उत्तरी हिस्से में ऐसे हालात बने रहेंगे। अगले दो दिनों तक यही स्थिति रहेगी। इसके बाद रात के तापमान में एक से दो डिग्री की वृद्धि होगी। उत्तरी हिस्से यानी सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में पारा 4.3 डिग्री तक पहुंच गया है। यह अभी सामान्य से 3.9 डिग्री कम है। सामरी, मैनपाट इलाके में न्यूनतम तापमान तीन डिग्री के बीच है। पेंड्रारोड में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री के करीब है। मैदानी इलाकों में दुर्ग सबसे ठंडा है। यहां न्यूनतम तापमान 9 डिग्री है, जो सामान्य से 4.5 डिग्री कम है। तापमान के 10 डिग्री से नीचे रहने और सामान्य से 4.5 डिग्री तक कम होने पर शीतलहर मानी जाती है। लिहाजा दुर्ग में शीतलहर है।


