भास्कर न्यूज | बठिंडा सर्दी का मौसम तेज होते ही शीतलहर और प्रदूषण का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। सर्द हवा के साथ प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने सांस संबंधी बीमारियों को और गंभीर बना दिया है। अस्पताल की ओपीडी एलर्जी, अस्थमा, सीओपीडी और सांस संबंधी समस्याओं के पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए चिंताजनक है। सिविल अस्पताल की जनरल ओपीडी में प्रतिदिन 1200 और वूमेन एंड चिल्ड्रन अस्पताल में 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन सोमवार को पंजाब बंद के चलते ओपीडी में सिर्फ 587 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचे। इनमें सबसे अधिक 164 मरीज एमडी मेडिसिन और 98 मरीज ऑर्थो ओपीडी में चेकअप कराने पहुंचे। इसी तरह पीडियाट्रिक ओपीडी में 73 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे। इसी तरह 17 होम्यो पैथी, 25 डेंटल, 27 ईएनटी, 26 गायनी, 33 नेत्र रोग, 9 फिजियोथरैपी, 35 साइकेट्रिस्ट, 44 स्कीन, 26 सर्जरी और 9 टीबी एंड चेस्ट ओपीडी में मरीज इलाज के लिए पहुंचे। बच्चों को ठंड के मौसम में हो सकता है निमोनिया शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल मदान ने बताया कि अगर बच्चों को ठंड के मौसम में कपड़े पहनाने में लापरवाही बरती तो उसे निमोनिया हो सकता है। यह बीमारी 5 साल से छोटे बच्चों में अधिक होती है। अस्पताल में सबसे अधिक लोग अपने बच्चे का इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। ठंड में बचाव के लिए बच्चों के शरीर को ढकने वाले गर्म कपड़े पहनाएं, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन करने से परहेज करें, चाय, गर्म पानी, फलों का रस का सेवन कर सकते हैं, बच्चों को धूप निकलने पर ही घर से निकलें, बाजार के खान-पान से परहेज करते हुए साफ-सुथरा माहौल बनाए रखें और खानपान पर विशेष ध्यान रखें।


