भास्कर न्यूज |ठेठईटांगर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए मुसीबत बन रही है। बारिश के कारण व्यवसाय प्रभावित हो रही है तो दूसरी ओर लोगों के आवागमन में भी परेशानी बन रही है। ठेठईटांगर प्रखंड के जोराम-राजाडेरा-बरपान ी मार्ग में बनाए जा रहे पुलिया 100 से अधिक घरों की आबादी वाले उक्त तीन गांव के लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। रायबहार के राजाडेरा के नजदीक कदलीबांध व मसनियां गांव के नजदीक पुलिया बनाने का कार्य किया जा रहा है। एक जगह पुल की ढलाई का कार्य किया गया है तो दूसरे जगह भी अब लभगभ ढालने का कार्य किया जाना है। ऐसे में दोनों स्थानों पर डायवर्सन बनाए गए थे किंतु बारिश अधिक होने के कारण डायवर्सन पानी मे डूब गया है और इससे उत्पन्न होने वाली समस्या से 100 से अधिक परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि डायवर्सन में पानी भरने के कारण वहां से ग्रामीणों के अलावा बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए पानी मे डूब कर जाना पड़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो इतनी दूर तक मरीज को कंधों में ढोकर लाने के लिए भी ग्रामीणों को मशक्कत उठानी पड़ेगी। सिमडेगा | जिले में पिछले 10 दिनों हुई तेज बारिश से किसान खेती का काम नहीं कर पाए। बुधवार को पानी थमा तो किसान खेती में जुट गए हैं। कहीं कहीं तो बारिश से हालत ऐसे हैं कि खेत की जुताई का काम भी नहीं हुआ है। कुछ ही इलाकों में बीड़ा लगाने का काम शुरू हुआ है। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बंधनू उरांव ने कहा कि जिले के किसान खेती में करीब 15 दिन पीछे चल रहे हैं। बारिश सामान्य रूप से होती तो खेती समय पर होती और अबतक धान के पौधे करीब डेढ़ फुट के हो गए होते। सामान्यतः 90 दिनों का होता है बारिश काल, अब मात्र 76 दिन हो रही है, बारिश और मौसम में आ रहे बदलाव पर नजर रख रहे तथा आंकड़ों को जुटा चुके कृषि वैज्ञानिक उरांव ने बताया कि सामान्य तौर बारिश 90 दिनों होनी चाहिए, लेकिन मौसम में लगातार बदलाव आ रहा है और पिछले कुछ वर्षों में बारिश के दिन घटकर 75 से 76 दिन ही रह गए है। इससे बारिश आधारित खेती पर प्रभाव पड़ा है। बदले हुए हालात में सही उत्पादन के लिए किसान क्या करें सवाल के जवाब में कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि किसानों को यांत्रिकीकरण का सहारा लेकर कार्य को तेज करना होगा।


