डिप्टी कलेक्टर,सब-इंस्पेक्टर, साध्वी…सोशल मीडिया पर सभी से छेड़छाड़:सोशल मीडिया पर एक्टिव महिला अफसर भद्दे कमेंट्स से परेशान

क्या आप शादी करोगी? आई लव यू… प्लीज कॉल मी, मुझसे बात करिए, मैं आपसे शादी करना चाहता हूं। यह किसी फिल्म का डायलॉग नहीं है बल्कि सोशल मीडिया पर भेजा गया मैसेज है। ग्वालियर के यूनिवर्सिटी थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर (एसआई) शैलजा सिंह को हर दिन उनके सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज मिलते हैं। ये केवल शैलजा सिंह के साथ ही नहीं है, बल्कि डिप्टी कलेक्टर रैंक की अफसर को भी आई लव यू और आई लाइक यू जैसे मैसेज मिलते हैं। हकीकत ये है कि प्रशासनिक अधिकारी से लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तक, हर वो महिला जो सार्वजनिक मंच पर अपनी पहचान बनाती है, उसे इस डिजिटल उत्पीड़न से गुजरना पड़ता है। यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब ये महिलाएं पुलिस या प्रशासन जैसे जिम्मेदार पदों पर होती हैं, जहां उनकी निजी सुरक्षा और पद की गरिमा भी दांव पर लगी होती है। भास्कर ने सोशल मीडिया पर चर्चित ऐसी महिलाओं से बात कर समझा कि वह कैसे लोकप्रियता के साथ आने वाली इस नकारात्मकता का सामना करती हैं? पढ़िए रिपोर्ट ज्यादातर मैसेज फेक प्रोफाइल से
29 वर्षीय शैलजा सिंह ग्वालियर के यूनिवर्सिटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी के साथ-साथ वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं, जहां वह अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। उनका मानना है कि सोशल मीडिया ने उन्हें अपनी एक अलग पहचान बनाने में मदद की है, लेकिन इस पहचान की एक कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ रही है। शैलजा बताती हैं, ‘शुरुआत में जब इक्का-दुक्का मैसेज आते थे, तो मैं उन्हें नजरअंदाज कर देती थी। धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया। हर दिन दर्जनों मैसेज आते हैं, जिनमें सीधे शादी के प्रस्ताव होते हैं।’ हाल ही में एक घटना का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि एक युवक ने उन्हें लगातार मैसेज भेजकर न सिर्फ शादी का प्रस्ताव दिया, बल्कि उनकी जाति तक पूछ डाली। उसने लिखा, ‘अगर आप राजपूत हैं, तो कौन-सी राजपूत हैं?’ शैलजा के अनुसार, इस तरह के अधिकांश संदेश फर्जी प्रोफाइल से आते हैं, क्योंकि लोग उनके पद और प्रोफेशनल प्रोफाइल से अच्छी तरह वाकिफ हैं और अपनी पहचान छिपाकर ऐसी हरकतें करते हैं। इन सबसे परेशान होकर आखिरकार उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर अपनी बात सार्वजनिक की। उन्होंने लिखा, ‘मैं सभी से अपील करती हूं कि इस तरह की तुच्छ हरकतें न करें। मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करती हूं, लेकिन मेरा विवाह मेरे माता-पिता की इच्छा और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार ही होगा।’ हर दूसरे मैसेज में शादी का प्रस्ताव एमपी की एक डिप्टी कलेक्टर का अनुभव भी कुछ ऐसा ही है। एक समय था जब वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं, लेकिन अब उन्होंने अपनी उपस्थिति को सीमित कर दिया है। वह बताती हैं कि जब उनका चयन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) में हुआ था, तो उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बधाई संदेशों के साथ-साथ शादी के प्रस्तावों की बाढ़ आ गई थी। वह कहती हैं, हर दूसरा मैसेज शादी के प्रस्ताव से जुड़ा होता था। भगवान का शुक्र है कि अब मेरी शादी हो चुकी है, इसलिए अब वैसे प्रस्ताव तो नहीं आते। शादी हो जाने से समस्या खत्म नहीं हुई, बस उसका स्वरूप बदल गया। अब लोग निजी जीवन में और ज्यादा दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। लोग पूछते हैं कि आपके पति कौन हैं, क्या करते हैं, आपका परिवार कहां रहता है, आप कहां रहती हैं? काम को लेकर भी करते हैं कमेंट्स
इसके अलावा, उन्हें अपने काम को लेकर भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। जब वह अपने काम से जुड़ी कोई पोस्ट करती हैं, तो कुछ लोग टिप्पणी करते हैं, ‘अब तो बड़ी अधिकारी बन गई हो, जरूर भ्रष्टाचार भी करती होगी।’ इस तरह की नकारात्मकता और निजी जीवन में बढ़ती दखलअंदाजी के कारण ही वह अब अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचती हैं। उनका मानना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी के लिए यह सुरक्षा और प्रोटोकॉल का भी मामला है। वह कहती हैं, ‘सोशल मीडिया पर ट्रोल्स से निपटने का कोई तरीका नहीं है, इसलिए उन्हें नजरअंदाज करना ही सबसे बेहतर विकल्प है।’ हर्षा बोली- मैं अब कमेंट्स को इग्नोर करती हूं
हर्षा रिछारिया एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, होस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें असली पहचान 2025 के प्रयागराज महाकुंभ के दौरान मिली, जब उनकी “सुंदर साध्वी” के रूप में तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए। रातों-रात उनके लाखों फॉलोअर्स बन गए। हर्षा अपने प्लेटफॉर्म पर ज्यादातर धार्मिक और आध्यात्मिक विचार साझा करती हैं। वह कहती हैं, ‘लोकप्रियता अपने साथ ट्रोलिंग भी लाती है। शुरुआत में जब लोग मुझे ट्रोल करते थे, तो मैं बहुत रोती थी। मैं सोचती थी कि सही कंटेंट डालती हूं, पूरे कपड़े पहनती हूं, फिर भी मुझे ट्रोल क्यों किया जा रहा है?’ हर्षा बताती हैं कि उनकी मां ने उन्हें समझाया, जिसके बाद से उन्होंने नकारात्मक टिप्पणियों पर ध्यान देना बंद कर दिया है। ट्रोलिंग का आलम यह था कि जब वह कुंभ के दौरान नकली जटा रखती थीं, तो लोग उन्हें ट्रोल करते थे। जब उन्होंने जटा हटा दी, तो लोग कहने लगे कि वह कुंभ में सिर्फ नाटक कर रही थीं और अब साध्वी से मॉडल बनेंगी। प्रसिद्धि के साथ ही उन्हें भी शादी के प्रस्तावों और “आई लव यू” वाले संदेशों का सामना करना पड़ा। एक्सपर्ट बोले- ऐसे लोगों के सामने पहचान का संकट इस तरह के ऑनलाइन व्यवहार के पीछे मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी दो प्रमुख कारण गिनाते हैं…

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