प्रकाश मिश्रा | गिरिडीह बगोदर बाजार से गुजरने वाला पुराना जीटी रोड अब सहजन के पेड़ों से हरा-भरा हो गया है। करीब एक हजार से ज्यादा सहजन के पेड़ इस सड़क की नई पहचान बन चुके हैं। वर्ष 2005 में जब जीटी रोड को फोर लेन बनाया गया था, तब बगोदर बाजार में सड़क किनारे लगे कई पेड़ काट दिए गए थे। सड़क बनने के बाद डिवाइडर का निर्माण हुआ। उसी समय बगोदर नीचे बाजार की रहने वाली राम प्यारी देवी ने डिवाइडर पर सहजन के पेड़ लगाने शुरू किए। इससे सड़क पर हरियाली दिखने लगी। घर के लोग इसके पत्ते, फूल और फल का उपयोग भी करने लगे। राम प्यारी देवी के साथ कार्तिक प्रसाद चौरसिया भी इस मुहिम से जुड़ गए। उन्होंने भी डिवाइडर पर सहजन की डालियां लगाईं। कुछ ही महीनों में डालियों ने पेड़ का रूप ले िलया। इस पहल का असर यह हुआ कि दो-तीन साल में बगोदर बाजार होकर गुजरने वाली करीब तीन किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क के दोनों किनारे रहने वाले लोगों ने अपने घरों के सामने सड़क के डिवाइडर पर सहजन लगाना शुरू कर दिया। हाल के वर्षों में कई बड़े और मोटे सहजन के पेड़ तैयार हो गए हैं। कुछ पेड़ आंधी और बारिश में गिर जाते हैं या टूट जाते हैं। उनकी डालियों को फिर से डिवाइडर के खाली हिस्सों में लगा दिया जाता है। इससे पुराने पेड़ के पास नया पेड़ तैयार हो जाता है। डुमरी की ओर से बगोदर बाजार में प्रवेश करने पर या अटका की ओर से आने पर डिवाइडर पर लगे हरे-भरे सहजन के पेड़ साफ नजर आते हैं।


