डिस्कॉम्स की पहल:प्रदेश डेटा सेंटर्स का हब बनेगा, अब दो ग्रिड सब स्टेशनों से निर्बाध होगी बिजली सप्लाई

राजस्थान आने वाले दिनों में डेटा सेंटर इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण हब बनने जा रहा है। राजस्थान डिस्कॉम्स के प्रयासों से अब यह हकीकत बनेगा। विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों याचिका स्वीकार कर ली है। इससे अब डिस्कॉम्स एक डेटा सेन्टर को दो 132 केवी ग्रिड सब स्टेशनों से जोड़कर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर पाएंगे। डेटा सेंटर्स के लिए अनवरत एवं भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति एक अनिवार्य शर्त है। क्योंकि एक ही सोर्स से सप्लाई होने के कारण ट्रिपिंग, फॉल्ट, मेंटीनेंस और सिस्टम फेल होने जैसी आकस्मिक स्थिति में सप्लाई स्विच होकर दूसरे वैकल्पिक सोर्स पर आ जाती है। यह विद्युत आपूर्ति डेटा सेंटर को निरन्तर सक्रिय रखती है। अब तक प्रदेश में वितरण निगमों के वर्तमान सप्लाई कोड तथा टैरिफ फॉर सप्लाई ऑफ इलेक्ट्रिसिटी-2025 में ऐसे सेंटर्स को दो डेडीकेटेड फीडरों से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं था। डेटा सेन्टर्स उद्योग के विकसित होने में यह बाधा बनी हुई थी। अब राजस्थान डिस्कॉम्स की पहल के बाद प्रदेश में भी डेटा सेन्टर्स को दोहरे स्रोत से बिजली मिल पाएगी। राजस्थान डिस्कॉम्स ने देश के उन राज्यों एवं शहरों में अपने इंजीनियर्स की टीम भेजी जहां डेटा सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां बड़ी संख्या में स्थापित हैं। इंजीनियर्स प्रमुख डेटा सेवा प्रदाता कंपनी एनटीटी और एसटीटी के वापी, मुम्बई तथा नोएडा स्थित ग्लोबल डेटा सेंटर्स पर गए और वहां इन सेंटर्स के विकसित होने के बारे में अध्ययन किया। इसमें यह सामने आया कि एक ही सिस्टम से पावर सप्लाई होना इस इंडस्ट्री के विकसित होने की राह में एक बड़ी बाधा है। इंजीनियरों की इस टीम ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर डिस्कॉम्स ने नियामक आयोग के समक्ष डेटा सेन्टर्स को दोहरे स्रोत से विद्युत आपूर्ति की अनुमति प्रदान करने के लिए अपनी याचिका प्रस्तुत की। इस पर आयोग ने 21 जनवरी को आदेश पारित कर डिस्कॉम्स को दोहरे स्रोत से विद्युत सप्लाई करने की अनुमति प्रदान कर दी। राजस्थान विगत समय में तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते उपयोग, ऑनलाइन सेवाओं की हर स्तर तक पहुंच, राजकीय कार्यों में सूचना तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, हर हाथ में मोबाइल, आदि के कारण डेटा की खपत लगातार बढ़ी है। डेटा सेंटर्स इस पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के केन्द्र होते हैं जो सम्पूर्ण सूचना प्रवाह को प्रोसेस और मैनेज करते हैं। भारत की लगभग 90 प्रतिशत डेटा सेंटर क्षमता मुम्बई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बंगलुरू जैसे शहरों में केन्द्रित है। गूगल, अमेजन जैसी टेक दिग्गज कंपनियां भारत में डेटा सेंटर्स स्थापित करने के लिए आगे आ रही हैं। अब राजस्थान भी इस दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ सकेगा। राजस्थान सरकार ने भी जारी की है नीति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डेटा सेंटर्स की उपयोगिता को देखते हुए राजस्थान डेटा सेंटर पॉलिसी-2025 लागू की है। इसमें डेटा सेंटर सेक्टर को विकसित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन एवं अन्य निर्णय लिए गए हैं। इसी तरह सुशासन में आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस को बढ़ावा देने के लिए एआई-एमएल नीति-2026 को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दी है। इन नीतियों की सफलता एवं राजस्थान को डेटा सेंटर का हब बनाने के लक्ष्यों की प्राप्ति में राजस्थान डिस्कॉम्स की यह पहल एक मजबूत कड़ी साबित होगी।

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