डीईओ के 50% पदों पर सीधी भर्ती होने से प्रिंसिपल को होगा नुकसान

एजुकेशन रिपोर्टर| बीकानेर शिक्षा मंत्री के मौखिक निर्देश के बाद शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पदों पर सीधी भर्ती की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि डीईओ पदों पर सीधी भर्ती का प्रावधान करने के लिए राज्य सरकार को पहले नियमों में बदलाव करना होगा। वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारियों के शत- प्रतिशत पद प्रमोशन से ही भरे जा रहे हैं। ‌ उधर, यदि राज्य सरकार की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों के 50% पदों पर सीधी भर्ती और 50% पदों पर प्रमोशन का नियम लागू किया जाता है तो इससे प्रिंसिपल को नुकसान होगा। वर्तमान में कार्यरत प्रिंसिपलों को डीईओ बनने में अधिक समय लगेगा। राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) की प्रदेश महामंत्री मनीष कस्वां ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेज कर डीईओ की सीधी भर्ती का विरोध किया है। ज्ञापन में बताया गया है कि शिक्षा विभाग में वर्तमान में व्याख्याता से ऊपर के पद प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल सहित सभी पद प्रमोशन से ही भरने का प्रावधान है। प्रिंसिपल व वाइस प्रिंसिपल पदों पर भी सीधी भर्ती नहीं की जा रही है। शिक्षा विभाग को युवा अधिकारी मिल सके इसलिए शिक्षक संघ रेसा ने प्राचार्य और वाइस प्रिंसिपल पदों पर सीधी भर्ती का समर्थन किया है। जबकि डीईओ की सीधी भर्ती का विरोध किया गया है। 27 साल पहले बनाया सीधी भर्ती का नियम, नहीं भरे गए सभी पद 27 साल पहले 1 अप्रैल 1998 में नियमों में संशोधन कर जिला शिक्षा अधिकारियों के 50% पदों पर सीधी भर्ती का प्रावधान किया गया। लेकिन लगभग 10 वर्षों तक सीधी भर्ती नहीं हो सकी। ऐसे में डीईओ के आधे से अधिक पद खाली ही रहते थे। बाद में राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर शत प्रतिशत पदों को डीपीसी से भरने का प्रावधान किया। ^संगठन डीईओ की सीधी भर्ती का विरोध करता है। प्राचार्य और वाइस प्रिंसिपल पदों पर सीधी भर्ती तथा डीईओ के शत प्रतिशत पदों को पूर्व की तरह भरने के संबंध में शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। -मनीष कस्वां, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा)

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