डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में उपस्थिति नियमों के सख्त अनुपालन ने छात्रों में उबाल ला दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है और जिन छात्रों की उपस्थिति इससे कम है, उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसी फैसले के विरोध में मंगलवार को झारखंड छात्र मोर्चा के बैनर तले छात्रों ने प्रशासनिक भवन में ताला जड़ दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने वोकेशनल कोर्स के 90 प्रतिशत छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया है। प्रदर्शनकारियों और विवि अधिकारी रजिस्ट्रार डॉ धनंजय बासुदेव द्विवेदी के बीच वार्ता हुई। अधिकारियों ने छात्रों से कहा कि इसमें घबराने की बात नहीं है। जो छात्र पिछड़ गए हैं, वे एक्स्ट्रा क्लास में शामिल होकर अपनी उपस्थिति पूरी कर सकते हैं और तभी परीक्षा में बैठ पाएंगे। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीबीए सेशन 2024-28 में कुल 330 छात्र नामांकित हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 34 छात्र ही 75 प्रतिशत उपस्थिति का मानक पूरा कर पाए हैं। इन्हीं छात्रों को मिड सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने दिया गया। तालाबंदी व विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व प्रेम प्रतीक केसरी ने किया। उनके साथ संकेत पाठक, अमन कुमार, आर्यन कुमार, शीतल कुमारी, साक्षी कुमारी, शिवम कुमार, मनमोहन सिंह, ऋषभ सिंहा आदि मौजूद थे। बीबीए कोर्स के निदेशक डॉ. गणेश चंद्र बास्के ने कहा कि यह एक प्रोफेशनल कोर्स है और छात्रों के भविष्य और करियर को ध्यान में रखते हुए उपस्थिति नियम से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमित उपस्थिति ही छात्रों को अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता की ओर ले जाएगी।


