डीग जिले की छह ग्राम पंचायतों में रविवार को ग्रामीण उत्थान शिविरों का आयोजन किया गया। ये शिविर राज्य सरकार के निर्देशों और जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित हुए, जिनका मुख्य उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना था। ये ग्राम पंचायतें सिनसिनी, साबौरा, नौनेरा, गोपालगढ़, जालूकी और गुलपाड़ा थीं।
शिविरों के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए। किसानों को बताया गया कि वैज्ञानिक विधि से मिट्टी की जांच कर खाद व बीज का उपयोग करने से कृषि उत्पादन में गुणात्मक सुधार होता है। उन्नत बीजों की उपलब्धता और वितरण प्रणाली को किसान सेवा केंद्रों के माध्यम से मजबूत करने की जानकारी भी दी गई। सिनसिनी में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को महात्मा गांधी नरेगा योजना में हुए बदलावों से अवगत कराया गया। उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि योजना का नाम अब ‘विकसित भारत श्रीरामजी’ कर दिया गया है। इसके तहत रोजगार दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी।
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पीएमएफएमई योजना के तहत आवेदन स्वीकार किए गए। शिविर में एक लाभार्थी ने तेल एक्सपेलर यूनिट स्थापित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, जिस पर नियमानुसार 35% अनुदान देय होगा। इस पहल को ग्रामीण उद्यमिता विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया गया।
प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की भावना के अनुरूप, राजस्व विभाग ने शिविर स्थल पर ही ओबीसी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई संपादित की। विभिन्न विभागों की सेवाओं की एक ही छत के नीचे उपलब्धता से ग्रामीणों के समय और संसाधनों की बचत हुई। सिनसिनी, साबौरा, नौनेरा, गोपालगढ़, जालूकी और गुलपाड़ा के ग्रामीणों ने इन शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लिया और मौके पर ही अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।


