डीग में आस्था की अनोखी मिसाल:बिना चंदे के 6 शिव मंदिरों की स्थापना करा चुके हैं 74 वर्षीय गोपालदास

आमतौर पर मंदिर निर्माण और जीर्णोद्धार के कार्य चंदा, सहयोग और अपीलों से जुड़े होते हैं, लेकिन डीग के 74 वर्षीय गोपाल दास बीड़ी वालों ने इस परंपरा से हटकर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। बीते 20 वर्षों से वे शिव परिवार मंदिरों की स्थापना और क्षतिग्रस्त मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य पूरी तरह अपनी निजी पूंजी से कर रहे हैं, बिना किसी से चंदा लिए या आर्थिक सहयोग मांगे अब तक गोपाल दास बीड़ी वाले शिव परिवार के करीब 6 मंदिरों की स्थापना कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एक शनिदेव मंदिर का निर्माण तथा लगभग एक दर्जन पुराने और क्षतिग्रस्त मंदिरों का जीर्णोद्धार भी कराया है। इन सभी धार्मिक कार्यों में वे अब तक लगभग 20 लाख रुपये की राशि स्वयं खर्च कर चुके हैं। उनका उद्देश्य केवल मंदिरों का निर्माण नहीं, बल्कि समाज के सामने ईमानदार और निस्वार्थ आस्था का उदाहरण प्रस्तुत करना है। वे मानते हैं कि श्रद्धा को न तो आर्थिक दबाव का साधन बनना चाहिए और न ही प्रचार का माध्यम। गोपाल दास बीड़ी वालों की यह यात्रा यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि आत्मा की सच्चाई से जन्म लेती है। उनके द्वारा निर्मित और जीर्णोद्धारित मंदिर आज केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं—कि यदि नीयत साफ हो, तो एक अकेला व्यक्ति भी समाज की आस्था का मजबूत स्तंभ बन सकता है। पुलिस थानों–चौकियों में मंदिर निर्माण डीग के सदर थाने में शिव परिवार व पंचमुखी हनुमान मंदिर, कामां रोड लाला कुंडा के पास शनि देव मंदिर, बहज चौकी–कोतवाली थाना परिसर, गोवर्धन गेट मुक्तिधाम, मेला ग्राउंड महेश्वरी मोहल्ला, सौघर मोहल्ला स्थित दाऊजी मंदिर और बुर्ज वाले हनुमान मंदिर की सीढ़ियों तक का निर्माण गोपालदास ने कराया। बच्चों को सक्षम बनाकर शुरू की आस्था की साधना वर्ष 1995 में चार बेटियों और एक बेटे का विवाह संपन्न कराने, बेटे को रोजगार में स्थापित करने और परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के बाद 54 वर्ष की उम्र में गोपाल ने अपने जीवन का उद्देश्य बदल दिया। उन्होंने स्वयं को पूरी तरह शिव मंदिर निर्माण, स्थापना और जीर्णोद्धार के कार्य में समर्पित कर दिया। उनकी साधना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि न उन्होंने कभी चंदा लिया, न किसी से आर्थिक सहयोग मांगा। मंदिरों के निर्माण और मरम्मत में जो भी खर्च हुआ, वह अपनी पूंजी से किया।

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