डीग शहर में कामकाजी महिलाओं के लिए एक आधुनिक वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ‘कामकाजी महिला निवास योजना’ के तहत बन रहे इस हॉस्टल पर लगभग 3 करोड़ 58 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह पहल घर से दूर नौकरी करने वाली महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास प्रदान करेगी। 50 कामकाजी महिलाओं के ठहरने की व्यवस्था लाल कोठी के पीछे निर्माणाधीन इस हॉस्टल में कुल 50 कामकाजी महिलाओं के ठहरने की व्यवस्था होगी। यहां महिलाओं को पेइंग गेस्ट हाउस की तर्ज पर रहने और भोजन की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सकेगा। हॉस्टल में केवल कामकाजी महिलाओं को ही रहने की अनुमति होगी। इस कामकाजी महिला आवास का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर किया जाएगा। प्रवेश के समय 2 हजार रुपए की अमानत राशि हॉस्टल के प्रबंधन के लिए एक महिला प्रबंधक नियुक्त की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित करने के लिए तीन महिला केयर टेकर और तीन सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहेंगे। निवासित महिलाओं से मैस, पानी, बिजली और गीजर जैसी सुविधाओं का शुल्क अलग से लिया जाएगा। व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं जैसे साबुन, तेल और शैम्पू का खर्च स्वयं वहन करना होगा। हॉस्टल में बिस्तर, अलमारी, कुर्सी और मेज जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रवेश के समय 2 हजार रुपए की अमानत राशि जमा करनी होगी। 50 हजार रुपए से कम मासिक वेतन वालों को सुविधा हॉस्टल में रहने के लिए मासिक किराया सुविधाओं के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। योजना के तहत, महिलाएं अपने कार्यस्थल के आसपास परिवार का घर न होने की शर्त पर ही यहां रह सकेंगी। वे अपने साथ 18 वर्ष से कम उम्र की बेटी और 12 वर्ष से कम उम्र के बेटे को रख सकेंगी। यह सुविधा वेतनभोगी और स्वरोजगार करने वाली दोनों तरह की महिलाओं के लिए उपलब्ध होगी, बशर्ते उनका मासिक वेतन 50 हजार रुपए से कम हो। 3 साल तक मिलेगा आवास एक कामकाजी महिला अधिकतम तीन वर्ष तक इस हॉस्टल में रह सकेगी। यदि उसका वेतन 50 हजार रुपए से अधिक हो जाता है, तो उसे छह माह के भीतर हॉस्टल खाली करना होगा। कामकाजी महिला आवास योजना में प्रदेश की मूल निवासी महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें भी एकल, विधवा, दिव्यांग और तलाकशुदा कामकाजी महिलाओं को पहले अवसर प्रदान किया जाएगा। यह हॉस्टल डीग में कामकाजी महिलाओं के लिए न केवल सुरक्षित आवास उपलब्ध कराएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मजबूत सहारा मिलेगा।


