डीग में ऐतिहासिक जलमहलों की उपेक्षा पर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश द्वारा 14 सरकारी कार्यालयों की चल संपत्ति कुर्क करने के आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आया है। न्यायालय की सख्त कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने जलमहलों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के आदेशों का पालन करते हुए, जिला कलेक्टर उत्सव कौशल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दिए गए कड़े निर्देशों के बाद, पीडब्ल्यूडी विभाग ने डीग-अलवर मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक जलमहलों के क्षेत्र में अतिक्रमण चिन्हित करने की कार्रवाई शुरू की। जलमहलों के दायरे में सड़क के मध्य से दोनों ओर 15-15 मीटर तक के अतिक्रमण को चिह्नित किया गया है। विशेष सफाई अभियान चलाया
इसी क्रम में नगर परिषद ने न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए जलमहलों से जुड़े दोनों प्रमुख तालाब – रूपसागर और गोपाल सागर – की व्यापक साफ-सफाई कराई। इसके साथ ही, किला परिसर, आसपास की सड़कों और रास्तों पर भी विशेष सफाई अभियान चलाया गया। नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा तालाबों के घाटों की सफाई की गई और झाड़ियों और अनावश्यक वृक्षों की छंटाई कराई गई। मत्स्य विभाग के सहयोग से तालाबों के जल को शुद्ध करने के लिए पोटेशियम परमैगनेट, चूना (लाइमस्टोन) और ब्लीचिंग पाउडर (हाइपरक्लोराइड) जैसे रसायनों का छिड़काव किया गया। साथ ही, तालाबों से मृत जलीय जीवों को भी बाहर निकाला गया। 2016 में दायर हुई थी जनहित याचिका
उल्लेखनीय है कि रियासतकालीन जलमहलों के तालाबों में गंदगी, दूषित पानी की आवक, किले की खाई पर अतिक्रमण, स्वच्छ जल प्रवाह और फव्वारों के संचालन जैसे मुद्दों को लेकर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता प्रवीण कुमार चौधरी, लखन कुंतल, मनोज कुमार बंसल, जयप्रकाश शर्मा और भरत सिंह फौजदार ने वर्ष 2016 में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने 31 जुलाई 2019 को एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया था। हालांकि, लगभग 6 वर्षों तक आदेशों का पालन नहीं होने पर, याचिकाकर्ता अधिवक्ताओं ने वर्ष 2024 में इजराय (execution petition) पेश की थी।


