डीग में सरकारी जमीन पर फर्जी पट्टे से दानपत्र-रजिस्ट्री:गोवर्धन गेट स्थित भूमि पर नगर परिषद ने जांच शुरू की

डीग नगर परिषद की सरकारी भूमि पर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शहर के गोवर्धन गेट क्षेत्र में स्थित इस भूमि पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर गलत स्टेट ग्रांट पट्टा जारी किया था। इसी फर्जी पट्टे के आधार पर पहले दानपत्र कराया गया और फिर उसी दानपत्र के सहारे जमीन की रजिस्ट्री भी करवा दी गई। यह मामला उजागर होने के बाद नगर परिषद ने इसकी जांच शुरू कर दी है और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं। तहसील कार्यालय में दानपत्र लिखवाया था
मामले के अनुसार, गोवर्धन गेट निवासी एक ही परिवार के सदस्यों ने 13 अगस्त 2025 को डीग तहसील कार्यालय में दानपत्र लिखवाया था।
इस दानपत्र के आधार पर नितेश पुत्र साहब सिंह और कप्तान सिंह पुत्र किशन सिंह ठाकुर, निवासी गोवर्धन गेट डीग ने 27 जनवरी 2026 को तहसील कार्यालय डीग में इंदर सिंह पुत्र नंदकिशोर जाट के नाम भूमि की रजिस्ट्री करवा दी। अधिशासी अधिकारी ने नियमों के विरुद्ध पट्टा जारी किया
नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह फौजदार ने सोमवार को इस मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गोवर्धन गेट क्षेत्र में स्थित यह भूमि पूरी तरह से नगर परिषद की संपत्ति है।
वर्ष 2012-13 में तत्कालीन नगर पालिका ने इस भूमि की बाउंड्री भी करवाई थी, जिससे यह स्पष्ट था कि यह सरकारी जमीन है। इसके बावजूद, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने इस जमीन पर स्टेट ग्रांट का पट्टा जारी कर दिया, जो नियमों के विरुद्ध था। गंभीर लापरवाही और अनियमितता का आरोप
आयुक्त फौजदार ने आगे बताया कि जारी किए गए पट्टे पर केवल अधिशासी अधिकारी के हस्ताक्षर थे। नियमानुसार इसमें अन्य आवश्यक स्वीकृतियां और प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी।
उस समय भी जमीन पूरी तरह खाली थी, फिर भी पट्टा जारी कर दिया गया। यह प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही और अनियमितता का संकेत देता है।
उन्होंने यह भी बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2016-17 में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी द्वारा उक्त स्टेट ग्रांट पट्टे को निरस्त कर दिया गया था। मृत व्यक्ति के नाम के पट्टे से दानपत्र और रजिस्ट्री
इसके बावजूद बलवीर के पुत्र साहब सिंह द्वारा अपने बेटे नितेश के नाम दानपत्र कर दिया गया। बाद में नितेश ने इसी दानपत्र के आधार पर इंदर सिंह के नाम जमीन का बैनामा करा दिया। नगर परिषद के अनुसार यह पूरा लेन–देन संदेह के घेरे में है और सरकारी भूमि के दुरुपयोग का गंभीर मामला बनता है। दो दिन में पेश करने होंगे दस्तावेज
नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह फौजदार ने बताया कि इस मामले में नगर परिषद की ओर से संबंधित सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। नोटिस के माध्यम से उन्हें दो दिन का समय दिया गया है, ताकि वे अपने पक्ष में वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार नगर परिषद
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नगर परिषद की सरकारी जमीन को अवैध कब्जे और फर्जी लेन–देन से मुक्त कराना परिषद की प्राथमिकता है। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो सरकारी भूमि को वापस लेने के लिए नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और आमजन भी सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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