अपराधों की जांच में साइबर फॉरेंसिक, डेटा एनालिटिक्स और जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। जीपीएस तकनीक के इस्तेमाल से घटनास्थल का लैटीट्यूड और लांगीट्यूड निकालें। इससे अपराधों का विश्लेषण करने में आसानी होगी। प्रदेश के सभी विवेचना अधिकारियों को नई तकनीक के आधार पर लगातार ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए। एसडीओपी और सीएसपी स्तर के अफसर सुपरविजन में सुधार लाएं, इससे विवेचना का स्तर और सुधर जाएगा। ये निर्देश डीजीपी कैलाश मकवाणा ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की सीआईडी, सतर्कता और तकनीकी सेवा शाखा की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि विवेचना में अब बहुत सी तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है, इसलिए सभी विवेचना अधिकारियों को जरूरी संसाधन भी उपलब्ध करवाए जाएं । अलग-अलग शाखाओं की समीक्षा पद संभालने के बाद डीजीपी ने 9 दिसंबर से पुलिस मुख्यालय की अलग-अलग शाखाओं की समीक्षा शुरू की है। सोमवार को डीजीपी ने प्रशासन शाखा की समीक्षा की इसके बाद मंगलवार को स्पेशल ब्रांच की समीक्षा की थी। बुधवार को सीआईडी, सतर्कता और तकनीकी सेवा शाखाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए सीसीटीवी, डेटाबेस और अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए। गुमशुदगी के मामलों में देश के अन्य राज्यों की सफल नीतियों और कार्यप्रणालियों को मप्र में भी लागू किया जाए। इसके लिए बाकायदा एक अलग टीम भी बनाएं। बैठक के दौरान डीजीपी ने लंबित मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए।


