बोर्ड परीक्षाओं के दौरान शहर में बढ़ता ध्वनि प्रदूषण अब विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। रात होते ही कई इलाकों में डीजे और साउंड सिस्टम की तेज आवाज गूंजने लगती है, जो देर रात तक जारी रहती है। तय समय सीमा की अनदेखी आम बात हो गई है और इसका सीधा असर परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ रहा है। नींद पूरी नहीं, बिगड़ रहा रूटीन अभिभावकों का कहना है कि शोर के कारण बच्चों को न पर्याप्त नींद मिल पा रही है और न ही शांत माहौल। देर रात तक चलने वाले तेज संगीत से पढ़ाई का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा रहा है। कई माता-पिता ने बताया कि बच्चे सुबह थकान महसूस करते हैं, जिससे दिनभर पढ़ाई में ध्यान नहीं लग पाता। इससे मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। नियम हैं, पालन नहीं ध्वनि विस्तारक यंत्रों को लेकर नियम बने होने के बावजूद नियंत्रण नजर नहीं आ रहा। नागरिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को सख्ती दिखानी चाहिए, लेकिन जमीन पर कार्रवाई बहुत कम दिखाई देती है। परीक्षा अवधि में तय समय के बाद डीजे और लाउडस्पीकर बंद कराने की मांग अब तेज हो गई है। विद्यार्थी परिषद ने दी चेतावनी मामले को लेकर विद्यार्थी परिषद भी सामने आई है। परिषद के प्रतिनिधि पीएन पांडेय ने कहा कि परीक्षा के समय इस तरह का शोर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो परिषद आंदोलन करेगी। शांत माहौल की अपील स्थानीय लोगों का कहना है कि थोड़ी सख्ती से ही छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है। उन्होंने प्रशासन से परीक्षा अवधि में शांत वातावरण सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि विद्यार्थी बिना बाधा अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। सीएसपी राजीव पाठक ने कहा कि सभी डीजे संचालकों की बैठक बुलाई जा रही है। नियमों का उल्लंघन कर छात्रों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करने वाले लापरवाह डीजे संचालकों पर कार्यवाही की जाएगी।


