डीडवाना-कुचामन जिले में प्रशासनिक तंत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब लगभग सभी SDM और तहसीलदार एकजुट होकर जिला कलेक्टर महेंद्र सिंह खड़गावत और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) के खिलाफ सड़कों पर आ गए।
इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को एक सामूहिक ज्ञापन भेजकर उच्चाधिकारियों पर गैर-कानूनी कार्यों के लिए दबाव बनाने, न्यायिक हस्तक्षेप करने और मानसिक प्रताड़ना देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उन पर रास्तों, पायतन और खातेदारी भूमि पर नियम विरुद्ध पट्टे जारी करने का दबाव बनाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, छोटी खाटू के आगुंता, शेरानी आबाद और किशनपुरा गांवों में ऐसे मामलों में मना करने के बावजूद दबाव जारी रहा। न्यायिक हस्तक्षेप का भी लगाया आरोप
इसके अलावा उपखंड स्तर के कोर्ट की ओर से दिए गए निर्णयों में भी उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के आरोप लगाए गए हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही गई है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। अधिकारियों ने यह भी शिकायत की है कि राजस्व विभाग के मूल कार्यों को प्रभावित करते हुए अन्य विभागों के कर्मचारियों को बिना अनुमति प्रतिनियुक्ति पर लगाया जा रहा है। साथ ही, पटवारियों को बिना पदस्थापन के नियम विरुद्ध अतिरिक्त चार्ज देने का दबाव तहसीलदारों पर डाला जा रहा है। अधिकारियों की छवि धूमिल करने के प्रयास का आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मौखिक आदेशों और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कारण जिले का पूरा राजस्व अमला मानसिक तनाव में है। इस सामूहिक विरोध में मकराना, डीडवाना, कुचामन और परबतसर के एसडीएम शामिल हैं। वहीं, छोटी खाटू, लाडनूं और मौलासर के तहसीलदार भी इस विरोध का हिस्सा बने हैं। ज्ञापन पर सभी के हस्ताक्षर होने से यह मामला अधिकारी बनाम अधिकारी के बड़े टकराव का रूप लेता दिख रहा है। कलेक्ट्रेट से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई सामने
मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगों में जिला कलेक्टर की ओर से जारी पट्टों की उच्च स्तरीय जांच, उपखंड न्यायालयों में हस्तक्षेप पर रोक और नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्तियों तथा अतिरिक्त चार्ज की प्रक्रिया समाप्त करने की मांग शामिल है। फिलहाल, इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, एक साथ इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों का खुलकर विरोध राज्य सरकार के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है।


