डीडवाना में पाढ़ा माता बस्ती में एक विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद का संगम देखने को मिला। इसकी मुख्य विशेषता यह थी कि विभिन्न संत परंपराओं और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रतिनिधि एक ही मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रामानुज परम्परा के संत श्रीकृष्णदास महाराज (मलूक पीठ आश्रम, वृन्दावन), वैष्णव परम्परा के गौवत्स संत विठ्ठल महाराज, निरंजन सम्प्रदाय के कोलिया पीठाधीश्वर स्वामी रामस्वरूप दास महाराज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक अशोक विजय मंचासीन रहे। सामूहिक संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ से हुआ शुभारंभ
हिन्दू सम्मेलन का शुभारंभ पं. महेश बहड़ के नेतृत्व में सामूहिक संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ और भारत माता के पूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम से पहले मातृशक्ति द्वारा पाढ़ा माता मंदिर से सेठों की गली चौक स्थित कार्यक्रम स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा बस्ती के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जिसका जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। देशभर में 1 लाख से ज्यादा हिंदू सम्मेलन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अमरीश माथुर ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में 1 लाख से अधिक हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अकेले जोधपुर प्रान्त में ही 1 हजार से अधिक सम्मेलन हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य बस्तीवार कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दू समाज के हर वर्ग तक पहुंचना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। विठ्ठल महाराज ने गाया ‘धरती धोरा री’
गौवत्स संत विठ्ठल महाराज ने मीराबाई के पदों और “धरती धोरा री” गीत का मधुर गायन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने मातृशक्ति से संस्कारों के संवर्धन का आह्वान किया। मलूक पीठ के श्रीकृष्णदास महाराज ने धर्म रक्षा के लिए शास्त्र और शस्त्र दोनों के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि कोलिया पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामस्वरूप दास जी महाराज ने समाज जागरण की शुरुआत अपने घर से करने पर बल दिया। आयोजन समिति के संरक्षक पं. पुरुषोत्तम व्यास के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में मंचस्थ संतों और अतिथियों का पुष्पहार, शॉल और अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया। पाढ़ा माता बस्ती के वरिष्ठजन रामचन्द्र माथुर, राजेन्द्र माथुर, मदनलाल चौहान, गोविन्द व्यास, नारायण मोदी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने अतिथियों का अभिनंदन किया। युवा वर्ग ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को संभाला।


