डूंगरपुर में जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के अध्यक्ष ने शुक्रवार को जिला कारागृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल में स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक बंदियों की मौजूदगी पर गंभीर चिंता व्यक्त की और स्थिति को मानवाधिकारों के विरुद्ध बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। जेल में क्षमता से अधिक बंदी, हालात चिंताजनक निरीक्षण में पाया गया कि कारागृह में वर्तमान में बंदियों की संख्या अनुमोदित क्षमता से काफी अधिक है। न्यायाधीश ने इस स्थिति को अनुचित और असुरक्षित बताते हुए कहा कि अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण बंदियों के लिए सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ न केवल बंदियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इससे न्याय की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। लंबित मामलों की सूची तैयार करने और पैरवी तेज करने के निर्देश स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला न्यायाधीश ने DLSA सचिव और चीफ लीगल एड डिफेन्स काउंसिल (LADC) को तत्काल निर्देश दिए कि सभी विचाराधीन बंदियों के लंबित मामलों की सूची तैयार की जाए, जहां जमानत या शीघ्र सुनवाई संभव है, उन मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए। चीफ लीगल एड डिफेन्स काउंसिल को निर्देश दिए गए कि प्रभावी पैरवी कर अधिक से अधिक बंदियों को कानूनी राहत दिलाई जाए। जेल प्रशासन को सुविधाएं सुनिश्चित करने का आदेश निरीक्षण के दौरान DLSA अध्यक्ष ने जेल प्रशासन को भी निर्देशित किया कि भीड़भाड़ के बावजूद स्वच्छ पेयजल, पौष्टिक भोजन और चिकित्सा सुविधा किसी हाल में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि वह हर बंदी के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए लगातार कार्य करता रहेगा और सुधार प्रक्रिया पर निरंतर निगरानी रखेगा।


