डूंगरपुर में एक 7 महीने की गर्भवती महिला की बच्चेदानी फट गई। इससे उसका काफी खून बह गया और जोरदार पेटदर्द के चलते उसकी हालत गंभीर हो गई। जिला अस्पताल में 10 यूनिट खून चढ़ाकर डॉक्टरों ने अत्यंत नाजुक हालत में उसका इलाज किया और उसकी जान बचाई।
महिला को 7 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दरअसल श्री हरिदेव जोशी जिला अस्पताल के मातृ शिशु अस्पताल में एक गर्भवती महिला की जान बचाई गई। कलालघाटा निवासी गौरी गमेती (30) पत्नी विमलेश गमेती को 7 महीने की गर्भावस्था के दौरान गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। इस महिला की पहले 3 बार सीजेरियन डिलीवरी हो चुकी थी और वह डायबिटीज से भी पीड़ित थी। बच्चेदानी फटने से अत्यंत नाजुक हालत में पहुंची थी अस्पताल
अस्पताल पहुंचने पर गौरी को अत्यधिक पेट दर्द और रक्तस्राव हो रहा था, और वह शॉक की स्थिति में थीं। जांच के बाद चिकित्सकों ने बच्चेदानी फटने (रप्चर यूटेरस) की पुष्टि की, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी।
हालात की गंभीरता को देखते हुए डॉ. मोनिका परमार, डॉ. आशीष प्रजापति, डॉ. गजेंद्र कलाल और डॉ. प्रियंका की टीम ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया। इस दौरान बच्चेदानी को सफलतापूर्वक हटाया गया। ऑपरेशन के दौरान और बाद में मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त चढ़ाया गया। एनेस्थीसिया सेवाएं डॉ. नीतू मौर्य ने दी। 7वें दिन टांके हटाए, छुट्टी दी गई
ऑपरेशन के बाद गौरी गमेती को 2 दिनों तक आईसीयू में निगरानी में रखा गया। उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने पर 7वें दिन टांके हटा दिए गए और स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्चे की पेट में हो मौत हो गई
डॉ. गजेंद्र कलाल ने बताया कि महिला गौरी गमेती को रात 12 बजे डूंगरपुर अस्पताल में लाया गया था। उस समय महिला की हालत काफी नाजुक थी। महिला को सबसे पहले भर्ती कर जांचे करवाई। 7 महीने की गर्भवती महिला की बच्चेदानी फट गई थी। जिससे उसके बच्चे की पेट में हो मौत हो गई थी।
महिला मरीज का शुगर लेवल भी 600 था। इलाज शुरू करने के बाद उसका शुगर लेवर कुछ कम हुआ और फिर ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। दूसरे दिन सुबह उसे ऑपरेशन थियेटर में लेकर ऑपरेशन किया। बच्चे की पहले मौत हो जाने और महिला की जान को बचाने के लिए बच्चेदानी को निकलना पड़ा। करीब ढाई घंटे तक जटिल ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दी गई। गौरी का पति विमलेश गमेती मजदूरी करता है।


