डूंगरपुर जिले के छोटे से गांव बरबोदनिया में प्रदेश का पहला महिलाओं का महिलाओं के लिए और महिलाओं की ओर से मिनी बैंक संचालित किया जा रहा है। कॉपरेटिव सोसायटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड और गांव की ही 2 महिलाओं द्वारा संचालित बैंक में महिलाओं के 1700 से अधिक खाते हैं। सालाना टर्नओवर भी 2 करोड़ से अधिक का है। करीब दो दशक से यह मिनी बैंक महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण पेश कर रहा है। जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर बरबोदनिया ग्राम पंचायत में एक ऐसा मिनी बैंक है, जहां सभी व्यवस्थाएं महिलाएं ही संभालती हैं। कैशियर, मैनेजर, अध्यक्ष पद पर महिलाएं काम कर रही हैं। इस बैंक में पुरुष के लिए कोई काम नहीं है। इस वजह से समिति सदस्यों और खातों में पुरुषों का नाम नहीं है। बैंक को महिलाएं ही संभालती हैं। इसे मिनी महिला बैंक के नाम से जाना जाता है। महिला मिनी बैंक की स्थापना 28 जनवरी 2002 को हुई थी। यह देश की दूसरी और राजस्थान और जनजातीय क्षेत्र की पहली महिला मिनी बैंक है। प्रबंधक सीमा भगत और कैशियर गजरा एकोत शुरुआत से ही अपनी सेवाएं दे रही हैं। ऐसे मिली प्रेरणा
मिनी बैंक का संचालन प्रबंधक सीमा भगत और कैशियर गजरादेवी कर रही हैं। साल 2001 में तत्कालीन टामटिया लेम्प्स व्यवस्थापक सोहनलाल सेवक की प्रेरणा से महिला बचत समूह शुरू किया। करीब छह महीने तक समूह चलाने के बाद 28 जनवरी 2002 को महिला मिनी बैंक के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया। वहीं तब से ये सिलसिला जारी है। बैंक में महिलाओं के 1700 से अधिक खाते
बैंक की महिला समिति में 281 सदस्य हैं। समिति अध्यक्ष शांतिदेवी पूंजोत हैं। बैंक में 642 बचत खाते, 666 आरडी खाते और 429 एफडी खाते संचालित हो रहे हैं। महिला मिनी बैंक की ओर से अब तक 213 महिलाओं को 40 लाख 45 हजार रुपए का ऋण दिया जा चुका है। बैंक की कुल जमा राशि दो करोड़ रुपए है। मासिक टर्नओवर औसतन 20 लाख रुपए है। बैंक का अपना भवन है, जहां से इसका संचालन किया जा रहा है। बचत खातों पर 8.25% तक ब्याज
इस बैंक में 642 महिलाओं का बचत खाता है। इस पर अधिकतम 8.25% ब्याज मिलता है। इसके पीछे मुख्य कारण लोन लेने वाली महिलाओं से 15% ब्याज लेना है। इसी लाभांश को बचत खाते में 8.25% के हिसाब से देते हैं। महिलाओं को 1 हजार से 1 लाख तक का लोन महज एक घंटे में दिया जाता है।


