डेयरी फार्मिंग में 70% लागत पोषण पर: किसानों को तकनीकों की ट्रेनिंग

भास्कर न्यूज |लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के पशु पोषण विभाग द्वारा विस्तार शिक्षा निदेशालय के तत्वावधान में डेयरी किसानों के लिए पोषण तकनीकें विषय पर पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों से 14 डेयरी किसान और फीड निर्माता शामिल हुए। प्रशिक्षण के समापन समारोह में विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आर. एस. ग्रेवाल ने कहा कि डेयरी फार्मिंग में कुल लागत का लगभग 65-70 प्रतिशत हिस्सा पोषण पर खर्च होता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक पोषण तकनीकों को अपनाने से चारे की लागत में काफी कमी लाई जा सकती है, जिससे डेयरी फार्मिंग की लाभप्रदता बढ़ती है। कोर्स डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. जे. एस. हुंडल ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को डेयरी पशुओं के पोषण से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था, ताकि टिकाऊ दूध उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को आधुनिक और लागत प्रभावी पोषण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को मिनरल मिक्सचर, बायपास फैट, यूरोमिन लिक तैयार करने और साइलेंज और हे मेकिंग सहित चारा संरक्षण तकनीकों की ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा वैज्ञानिक फीड फॉर्मूलेशन, बछड़े से लेकर वयस्क दूध देने वाले पशुओं तक पोषण प्रबंधन, ट्रांजिशन फीडिंग, विटामिन और मिनरल पोषण तथा स्थानीय उपलब्ध फीड संसाधनों से संतुलित आहार तैयार करने पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए गए। कार्यक्रम में फीड और चारे में अफ्लाटॉक्सिन संदूषण और इसके नियंत्रण पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, साथ ही फीड टेस्टिंग और पशु स्वास्थ्य व उत्पादकता में इसकी महत्ता पर भी प्रदर्शन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. उदयबीर सिंह, डॉ. अमित शर्मा और डॉ. जुजहर सिंह सिद्धू ने किया। किसानों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह प्रशिक्षण पंजाब में वैज्ञानिक फीडिंग पद्धतियों, लागत प्रभावी पोषण और टिकाऊ डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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