भास्कर न्यूज | कापू किसानों को रबी सीजन में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने कुमरता व सलखेता जलाशय के शीर्ष व नहरों के रिमॉडलिंग और लाइनिंग काम स्वीकृत हुए थे। निर्माण में लापरवाही, कमजोर गुणवत्ता और विभागीय मिलीभगत अब खुलकर सामने आने लगी है। कुमरता जलाशय से सलका, कापू, गोढ़ीखुर्द तक नहरों का काम लगभग 4 करोड़ की लागत से हो रहा है। वहीं 2.19 करोड़ रुपए की लागत का सलखेता जलाशय नहर निर्माण धरमजयगढ़ जल संसाधन विभाग की निगरानी में चल रहा है। जांजगीर के ठेकेदार बालाजी कंस्ट्रक्शन की ओर से किए जा रहे कामों की समय पर मॉनिटरिंग न होने का खामियाजा किसानों और सरकारी खजाने को उठाना पड़ रहा है। विभाग की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस अधिकारी के खिलाफ आरोप लगे थे, उसे ही जांच अधिकारी बनाया गया है। 21 जुलाई 2025 को शिकायतकर्ता आनंद स्वरूप ने फोटोग्राफ सहित ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार कार्यपालन अभियंता सत्येंद्र विश्वकर्मा की भूमिका संदिग्ध है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी गई है। ईई विश्वकर्मा ने रिपोर्ट में अनियमितताओं को नकारते हुए लिखा है कि किसी भी प्रकार की टूट-फूट नहीं हुई है। केस 1– सलका, फिटिंगपारा रिमॉडलिंग के दौरान खेतों से पानी निकालने पाइप लगाने की व्यवस्था ही नहीं की गई। पाइप न लगाकर ठेकेदार ने लागत घटाई और बारिश में पानी के दबाव से मेढ़ टूटी और पूरा केनाल बह गया। केस 2 – बैरागी केनाल सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर पड़े थे, जिन्हें हटाया जाना चाहिए था। विभाग के अधिकारियों ने इन्हीं पत्थरों पर कंक्रीट कराकर निर्माण करा दिया। इस संबंध में पूछने पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि इस्टिमेट में पत्थर हटाने का प्रावधान नहीं था, अब जोड़ा जा रहा है। इस्टिमेट अधूरा होने के बाद भी निर्माण शुरू करा दिया गया। साफ है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया निर्माण को बढ़ावा दिया गया है।


