हम मोबाइल फोन को अपडेट करते हैं, लेकिन अपने ज्ञान और सोच को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। यही बात भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी ने कही। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सकारात्मक रूप से अपनाकर होम्योपैथी चिकित्सा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। हेल्दी वर्ल्ड विजन फाउंडेशन ने आयोजित इस सम्मेलन में एनीमिया जागरूकता अभियान को अस्पतालों से बाहर निकालकर घर-घर तक ले जाने और इसे राष्ट्रीय जनआंदोलन बनाने का रोडमैप भी सामने आया। पंडित खुशीलाल शर्मा आयुष ऑडिटोरियम में नेशनल होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर से होम्योपैथी चिकित्सक, मेडिकल छात्र, शोधकर्ता और विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य होम्योपैथी चिकित्सा को आधुनिक तकनीक, शोध और जनजागरूकता से जोड़ना रहा। AI के साथ आगे बढ़ने का आह्वान सम्मेलन के प्रमुख वक्ता डॉ. एके द्विवेदी ने कहा कि आज के दौर में चिकित्सा को तकनीक से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि हम अपने मोबाइल को तो समय-समय पर अपडेट करते हैं, लेकिन खुद को अपडेट करना भूल जाते हैं। डॉ. द्विवेदी ने चिकित्सकों और विद्यार्थियों से अपील भी की कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डर के बजाय अवसर के रूप में देखें। AI के सही उपयोग से मरीजों की मॉनिटरिंग, केस एनालिसिस और उपचार की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकता है। एनीमिया जागरूकता अभियान बनेगा राष्ट्रीय आंदोलन डॉ. द्विवेदी ने बताया कि एनीमिया को लेकर सालों से चल रहा जागरूकता अभियान अब मध्यप्रदेश से निकलकर पूरे देश में फैलने जा रहा है। यह अभियान 27 साल पहले इंदौर से शुरू हुआ था और निरंतर जनसेवा, शोध और जागरूकता के कारण अब राष्ट्रीय पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह केवल अभियान नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप लेगा। अप्लास्टिक एनीमिया के सफल उपचार बने चर्चा का विषय होमियोविजन-3 राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में डॉ. द्विवेदी ने अप्लास्टिक एनीमिया से पूरी तरह स्वस्थ हुए मरीजों के उपचार प्रकरण प्रस्तुत किए। इन केस स्टडीज़ को देशभर से आए चिकित्सकों और छात्रों ने सराहा। उन्होंने बताया कि सही दवा, निरंतर फॉलोअप और समग्र दृष्टिकोण से गंभीर बीमारियों में भी सकारात्मक परिणाम संभव हैं। 17 फरवरी से इंदौर में विशेष अभियान इस वर्ष एनीमिया जागरूकता अभियान 17 फरवरी से 1 मार्च तक इंदौर में आयोजित किया जाएगा। अभियान का समापन राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन के रूप में होगा। इसमें होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (मध्यप्रदेश शाखा) के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल होंगे। इंदौर सांसद सेवा प्रकल्प इस अभियान में मुख्य सहयोगी की भूमिका निभाएगा। अब अस्पतालों से निकलकर घर-घर पहुंचेगा अभियान डॉ. द्विवेदी ने बताया कि इस बार रणनीति बदली गई है। अभियान अब अस्पतालों और सभागारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे आम लोगों के घरों तक पहुंचेगा। लोगों को एनीमिया के सामान्य लेकिन अनदेखे लक्षण जैसे कमजोरी, थकान, चक्कर आना, भूख कम लगना और त्वचा व आंखों में पीलापन के बारे में जागरूक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मुफ्त हीमोग्लोबिन जांच और परामर्श भी दिया जाएगा। पोषण को बनाया गया अभियान की ताकत अभियान में पोषण पर खास जोर रहेगा। भुना चना, गुड़, खजूर, किशमिश जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा, ताकि आयरन की कमी को प्राकृतिक तरीकों से दूर किया जा सके। इस साल एनीमिया जागरूकता रथ, घर-घर संपर्क और मेडिकल छात्रों की सक्रिय भागीदारी से 70 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह पहल धीरे-धीरे देशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले रही है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया बड़ी चुनौती डॉ. द्विवेदी ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताया। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित हीमोग्लोबिन जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज और राष्ट्र की आधारशिला होती है।


