डॉक्टर का MBA दुल्हन से निकाह, परिवार जात-गांव बाहर:बकरे की तरह हलाल करने की धमकी; न लोग बात करते हैं, न दुकानदार सामान देते हैं

आज से अल्लाहबक्श और इकबाल के परिवार का हुक्का-पानी बंद किया जाता है। अब वे गांव में किसी दुकानदार से सामान नहीं खरीद सकते। न ही नाड़ी और तालाब से पानी ला सकते हैं। न गांव में मजदूरी कर सकते हैं, न ही गांव में व्यापार कर सकते हैं। गांव के किसी भी व्यक्ति के साथ उठ-बैठ नहीं सकते हैं। इन्हें 3 साल के लिए गांव से बाहर किया जाता है। गांव का कोई व्यक्ति इनसे मिलेगा या इनकी सहायता करेगा तो उसे भी इसी दण्ड से दण्डित किया जाएगा। 1 साल पहले 30 दिसंबर 2024 को ये तुगलकी फरमान नागौर जिले से 8 किमी दूर बसे बासनी शहर में मुस्लिम समाज की नागौरी कौमी सोसायटी ने सुनाया। सोसायटी से जुड़े लोगों ने इस फरमान को वॉट्सऐप ग्रुपों में फॉरवर्ड किया। नोटिस बोर्ड पर चिपकाया। टेंपो और गाड़ियों में लाउड स्पीकर लगाकर मुनादी कराई। अब एक साल बाद बासनी के अल्लाहबक्श ने नागौर के सदर थाने में नागौरी कौमी सोसायटी बासनी के पदाधिकारियों और कई अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। मामले की पड़ताल के लिए भास्कर रिपोर्टर बासनी शहर पहुंचा। सबसे पहले अल्लाहबक्श से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी बासनी में दुकान बंद करवा दी थी। ऐसे में उन्होंने नागौर-जोधपुर बाइपास पर नई दुकान खोली है। इस पर हम वहां पहुंचे। अल्लाहबक्श ने बताया- 24 अक्टूबर 2024 को बेटे रियान का निकाह बासनी बेहलीमा के इकबाल की बेटी गुलनार के साथ रूण गांव में हुआ। मेरे समाज के कुछ बदमाश प्रवृत्ति के लोग विरोध में थे, जबकि ये निकाह मेरे और इकबाल के परिवार की रजामंदी से हुआ था। निकाह वाले दिन इन लोगों ने रूण गांव पहुंचकर मारपीट की थी, जिसकी रिपोर्ट कुचेरा पुलिस थाने में दी गई थी। इसके बाद 30 दिसंबर 2024 की रात बासनी बेहलीमा के सदर बाजार में स्थित नागौरी कौमी सोसायटी के ऑफिस में सोसायटी के अध्यक्ष हबीबुरर्हमान कालूवाले, उपाध्यक्ष सलीम, सचिव लियाकत व अन्य 10-12 लोगों ने एक मीटिंग की। इसी मीटिंग में उन लोगों ने मेरे और इकबाल के परिवार के खिलाफ गांव से बाहर करने करने का फरमान जारी कर दिया। टैक्सी पर लाउड स्पीकर लगाकर पूरे गांव में इस फरमान की मुरादी कराई। मेरी फूलपुरा में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास सुराका इलेक्ट्रोनिक्स के दुकान थी, जिसे सोसायटी के लोगों ने बंद करा दिया। अल्लाहबक्श ने आरोप लगाया कि 10 जनवरी 2025 को सोसायटी के अध्यक्ष हबीबुर्रहमान ने मुझे कहा कि ये गांव छोड़ दे नहीं तो तेरे बेटे-बहू को बकरे की तरह हलाल कर देंगे। मैंने उससे बहुत विनती की कि हमें गांव से बाहर मत करो। इस पर हबीबुर्रहमान और उसके साथ के लोगों ने कहा- तुम्हें 2 दिन का समय दिया जाता है, गांव खाली कर दो, वरना तुम्हारे बेटे और बहू की हत्या कर देंगे। इसके बाद से लगातार एक साल से रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस के चक्कर काट रहा हूं। कोई सुनवाई नहीं हुई। नए एसपी आने के बाद करीब 3-4 बार उनसे जाकर मिला। अब एसपी साहब के दखल से ये मुकदमा दर्ज हुआ है। हमारी कौमी सोसायटी में कई लोग बढ़िया हैं, लेकिन वो सब इन पदाधिकारियों से खौफ में हैं। अल्लाहबक्श से बातचीत के बाद हमने उन्हें अपने बेटे-बहू से मिलवाने को कहा। इस पर वो हमें अपने साथ घर ले गए। वहां पहुंचकर देखा कि अल्लाहबक्श के मोहल्ले में कोई भी उनसे बात नहीं कर रहा था। यहां हमें अल्लाहबक्श के बेटे रियान मिले। रियान डॉक्टर हैं, फिलहाल एमडी की तैयारी कर रहे हैं। रियान ने बताया- साल 2024 में मेरी उम्र 28 साल थी। मैंने मेट्रिमोनियल साइट पर सर्च करना स्टार्ट किया। वहां मुझे गुलनार का प्रोफाइल मिल गया। गुलनार एमबीए थी और बड़ी कंपनी में एचआर मैनेजर का काम कर रही थी। उसकी भी जड़ें बासनी से जुड़ी हुई थी। उसकी दादी का घर बासनी का ही था। ऐसे में हम दोनों ने निकाह करना तय कर लिया। रियान ने बताया- सब कुछ फाइनल होने के बाद मैंने और मेरे पापा ने नागौरी कौमी सोसायटी में अपनी शादी की परमिशन के लिए अर्जी दी। सोसायटी के लोगों ने परमिशन देने से मना कर दिया। बोले- आपको बासनी में ही बासनी की कौम की किसी लड़की से ही निकाह करना होगा। ये मेरे लिए पॉसिबल नहीं था। हम कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं चाहते थे, इसलिए बासनी से दूर रूण गांव में जाकर 24 अक्टूबर 2024 को निकाह कर लिया। निकाह के वक्त कौमी सोसायटी के लोग गाड़ियों में भर कर आए और बाहर खड़े लोगों से मारपीट करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद इन लोगों ने हमारा सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया। अब हाल ये है कि मैं अपने कजिन्स के निकाह में भी शामिल नहीं हाे पाता। दोस्तों ने बात करना बंद कर दिया। एक दोस्त बचा है, वो भी मुझसे छुपकर ही बात करता है। मेरा और गुलनार का घर से बाहर निकलना बंद हो गया। मुझे कोई जॉब भी नहीं करने दे रहे हैं। मैंने सोचा था कि 3 साल निकल जाएंगे तो उसके बाद सब ठीक हो जाएगा। दादी भी यही कहती थी, लेकिन अब इन लोगों ने पापा को और परेशान करना शुरू कर दिया है। इसके बाद हमने रियान की पत्नी गुलनार से बात की। गुलनार ने बताया- मैं मुंबई से हूं और वहीं से एचआर में एमबीए किया हैं। मेरे पिता इकबाल कन्वर्टेड मुस्लिम हैं। उन्हें बासनी के रहने वाले उनके दादा ने गोद लिया था। उस लिहाज से मैं बासनी से ही हूं। गुलनार ने बताया- इस्लाम अपनाने से पहले मेरे पापा का नाम करण राठौड़ था। वो बचपन में ही इस्लाम अपना चुके थे। गुलनार ने बताया- मैं हमेशा से बासनी में ही निकाह करना चाहती थी। जल्द ही मेरी डिलीवरी होने वाली है। मैं अपनी डिलीवरी भी यहीं करवाना चाहती हूं। हाल में 22 दिसंबर 2025 को मेरी मां नगमा बानो रात करीब 10:30 बजे मेरी बुआ आइशा बानो के घर रुकी हुई थी। मैं भी वहीं थी। बासनी की नागौरी कौमी सोसायटी के सदर हबीबुर्रहमान शहर से बाहर थे, ऐसे में भास्कर ने फोन कॉल कर उनका पक्ष जाना। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बोले- ये पूरा मामला झूठा है। मैं तो 23 दिसंबर से मुंबई में हूं। हमारी सोसायटी में दहेज लेना और देना दोनों ही मना हैं। ये दहेज लेना चाहते थे तो इन्होंने बाहर जाकर निकाह किया। सोसायटी के बायलॉज से अगेंस्ट गए तो हमने इनकी सोसायटी की सदस्यता खत्म कर दी। बस ये ही मामला है। हमारे शहर में 60 हजार की आबादी है। सैकड़ों डॉक्टर, सीए और इंजीनियर हैं। सब पढ़े लिखे लोग हैं। वहां कोई तालिबानी फैसले हो ही नहीं सकते। हम लोग निकाह में दहेज को लेकर पड़ताल करने गए तो इन्होंने हमारे साथ मारपीट की और वहां से भगा दिया। वो लड़की मुस्लिम है, लेकिन वो हमारे शहर और समाज की नहीं हैं। इस पूरे मामले की इन्वेस्टिगेशन कर रहे नागौर सदर थाने के एसएचओ सुरेश कुमार का कहना है कि पूर्व में पीड़ित परिवार ने निकाह के समय मारपीट और परेशान करने की शिकायत कुचेरा थाने में दी थी। अब हाल में सदर थाने में नागौरी कौमी सोसायटी बासनी के सदर और कुछ अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया है। जिस पर जांच शुरू कर दी है। 1 साल तक पुलिस के सुनवाई नहीं करने के आरोप गलत हैं।

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