जिले का स्वास्थ्य विभाग खस्ताहाल है। शहर से महज 10 किमी दूर शिवकर पीएचसी खुद बीमार है। पीएचसी का भवन जर्जर है। हालात यह हैं कि यहां इलाज करने वाले डॉक्टर खुद सुरक्षित नहीं हैं। डॉक्टर के चेंबर, ड्रेसिंग रूम और गैलेरी का प्लास्टर उखड़-उखड़ कर गिर रहा है। हादसे के डर से डॉक्टरों ने अपनी कुर्सियां पैथोलॉजी लैब में लगा ली हैं और वहीं से ओपीडी संचालित की जा रही है। इससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। पीएचसी पर दो डॉक्टर सहित 8 का स्टाफ कार्यरत है लेकिन बुधवार महज 4 का स्टाफ ही मौजूद मिला। शेष 4 का स्टाफ ड्यूटी समय पर नदारद मिला। कोई अधिकारी जांच में आए तो पहले से स्टाफ की ओर से प्रार्थना पत्र लिखा रहता है। ऐसे में सीएल लगा दी जाती है अन्यथा बिना ड्यूटी के ही उपस्थिति दर्ज हो रही है। पीएचसी पर लैब टेक्नीशियन तो कार्यरत है लेकिन सबसे जरूरी जांच सीबीसी की सुविधा नहीं है। सीबीसी जांच के लिए मरीजों को बाड़मेर जिला अस्पताल आना पड़ रहा है। अस्पताल में लैब टेक्नीशियन तो है, लेकिन सबसे जरूरी ”सीबीसी” (Complete Blood Count) मशीन ही नहीं है। बुखार, डेंगू या किसी भी संक्रमण में डॉक्टर सबसे पहले यही जांच लिखते हैं, जिसके लिए मरीजों को 10 किमी दूर बाड़मेर जाना पड़ता है। यहां सिर्फ मलेरिया, शुगर, बीपी और यूरीन जैसी रूटीन जांचें ही हो पा रही हैं। ^पीएचसी पर कार्यरत स्टाफ की जानकारी नहीं है। मामले की जांच करवाई जाएगी। पीएचसी भवन की जल्द रिपेयरिंग करवाई जाएगी। सीबीसी जांच सुविधा मरीजों के लिए जल्द शुरू करवाई जाएगी- डॉ. विष्णुराम विश्नोई, सीएमएचओ बाड़मेर। टीम बुधवार दोपहर 2:10 बजे पीएचसी शिवकर पहुंची। पीएचसी पर 2 डॉक्टर समेत कुल 8 का स्टाफ है, लेकिन मौके पर केवल 4 मिले। जीएनएम, एएनएम, एलएचवी और पीएचसी इंचार्ज गायब थे। पूछने पर बताया गया कि इंचार्ज डॉक्टर की ड्यूटी चवा सीएचसी पर है। वहीं, अन्य स्टाफ के बारे में तर्क दिया गया कि उनका प्रार्थना पत्र रखा है। हकीकत यह है कि अगर कोई अधिकारी जांच में आए तो सीएल चढ़ा दी जाती है, वरना बिना ड्यूटी के ही हाजिरी पक रही है। लैब में मरीजों की डॉक्टर जांच करते दिखे। रोजाना 50 मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में डॉक्टर के बैठने की जगह नहीं है। जिस लैब में मरीजों के खून-पेशाब की जांच होती है, वहीं बैठकर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। इससे क्रॉस-इंफेक्शन का खतरा बना हुआ है। डे-केयर वार्ड में महज एक बेड है। मरीज को एडमिट करने की सुविधा नहीं है, सिर्फ ड्रिप लगाकर रवाना कर दिया जाता है। बंद जर्जर डॉक्टर ओपीडी रूम हॉल के एक कोने में ड्रेसिंग के लिए दो टेबल की व्यवस्था है। लैब पर सीबीसी मशीन की सुविधा नहीं है। बुखार, डेंगू या किसी भी संक्रमण में डॉक्टर सबसे पहले यही जांच लिखते हैं, इसके लिए मरीजों को 10 किमी दूर बाड़मेर जाना पड़ता है।


