कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के छोटे भाई के सरकारी बिल्डिंग का शिलान्यास करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पर सांसद मुरारीलाल मीणा ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन और नियमों का उल्लंघन बताया। साथ ही मामले में लोक सभा स्पीकर ओम बिरला और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। सांसद का कहना हैं- डॉ. किरोड़ी के भाई और भाजपा के पूर्व प्रत्याशी जगमोहन मीणा के सरकारी कार्यक्रमों का उद्घाटन करने का मुद्दा संसद की विशेषाधिकार समिति के सामने उठाएंगे। पहले देखिए वो तस्वीर, जिससे विवाद पैदा हुआ 17 नवंबर को डॉ.किरोड़ी के भाई ने किया था उद्घाटन
दौसा विधानसभा क्षेत्र के लवाण ब्लॉक की बूटौली और मूसोलाई ग्राम पंचायतों में 17 नवम्बर को समसा(समग्र शिक्षा अभियान) द्वारा नवीन भवनों का शिलान्यास भाजपा प्रत्याशी रहे जगमोहन मीणा से करवाया गया था। इस पर दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने भी आपत्ति जताई थी। विधायक के बाद अब दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा ने भी विरोध जताया है। उन्होंने 25 नवंबर को मुख्य सचिव को पत्र लिखा, जिसमें भाजपा प्रत्याशी के सरकारी कार्यक्रमों को नियमों के खिलाफ बताया। अब पढ़िए- सांसद का मुख्य सचिव को लिखा पत्र यह लिखा पत्र में
सांसद ने पत्र में लिखा- मेरे संसदीय क्षेत्र में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में केंद्रीय निधि से कई विकास कार्य संचालित और पूर्ण किए जा रहे हैं। मेरे द्वारा संसद में मांग उठाने को लेकर संबंधित मंत्रियों के साथ पत्राचार, बैठकें और प्रयासों के माध्यम से कई योजनाओं और परियोजनाओं को दौसा संसदीय क्षेत्र के लिए स्वीकृत एवं चालू कराया गया है, लेकिन दुर्भाग्यवश उन कार्यों की पट्टिकाओं पर मेरा नाम नहीं जोड़ा जा रहा है और न ही उद्घाटन कार्यक्रमों में मुझे आमंत्रण भेजा जा रहा है, जो अत्यंत खेदजनक है। हाल ही में मेरे संज्ञान में आया कि इन कार्यों की उद्घाटन पट्टिकाओं पर जो सिर्फ लोकसभा या विधानसभा उम्मीदवार रहे हैं, उनके नाम अंकित किए जा रहे हैं। जबकि मैं वर्तमान में क्षेत्र का निर्वाचित सांसद हूं, यह स्थिति न केवल प्रोटोकॉल के खिलाफ है, बल्कि संसदीय मर्यादा एवं परंपराओं के भी प्रतिकूल है। मेरे सांसद कार्यकाल में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जो भी विकास कार्य हुए हैं, उनकी सभी पट्टिकाओं पर मेरा नाम अंकित करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाए। जिससे वर्तमान जनप्रतिनिधि की भूमिका और उत्तरदायित्व का सम्मान सुनिश्चित हो सके। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी करें, ताकि भविष्य में इस प्रकार के लापरवाही ना हो तथा सभी कार्य निर्धारित नियमों, प्रोटोकॉल और संसदीय परंपराओं के अनुरूप संपादित हो। यदि भविष्य में भी इस प्रकार की लापरवाही देखने को मिलती है तो मुझे अधिकारियों की इस चूक का विषय संसद की विशेष अधिकार समिति के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। सांसद बोले- नियमों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों को मिले पनीशमेंट
इस बारे में सांसद ने मीडिया से भी बातचीत कीं। उन्होंने कहा- पिछले दिनों समग्र शिक्षा समेत कई ऐसे शिलान्यास कार्यक्रम हुए हैं, जिनमें केंद्रीय निधि का उपयोग होता है। उन कार्यक्रमों में विधायक और सांसद की अनदेखी की गई है। जबकि विधायक हो या सांसद, यह नियम है कि जिन विकास कार्यों में केंद्रीय निधि का उपयोग होता है, उन कार्यों के शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों में क्षेत्रीय सांसद का होना जरूरी होता है। ऐसे में यदि कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि की अनदेखी करता है तो वह उसके अधिकारों का हनन है। ऐसा ही नियम विधायक को लेकर भी लागू होता है। इसे लेकर मैंने लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसके बावजूद अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो लोकसभा की कमेटी के समक्ष मुद्दा उठाकर नियम अनुसार कानूनी कार्रवाई करवाई जाएगी। उन अधिकारियों को कमेटी द्वारा पनीशमेंट दिलाया जाएगा। विधायक बोले- जिम्मेदार अधिकारी कर रहे तानाशाही
दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने भी मामले में कड़ी आपत्ति जताई थी। विधायक ने आरोप लगाए थे कि यह हमारे अधिकारों का हनन है, हम भी जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। पूर्व में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अवहेलना नहीं की गई। लेकिन इस बार भाजपा नेताओं से शिलान्यास करवाकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई और स्थानीय सांसद, विधायक, जिला परिषद सदस्य जैसे अन्य जनप्रतिनिधियों का पट्टिका में नाम नहीं देना विभाग व सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों की तानाशाही दिखती है। अधिकारी दबाव में जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों की अवहेलना करना चाहते हैं। अगर आगे ऐसे कार्यक्रम होते हैं तो पुरजोर विरोध करेंगे और शिक्षा मंत्री के समक्ष बात रखी जाएगी। आगामी विधानसभा सत्र में मुद्दा उठाया जाएगा व संबधित अधिकारियों में शिकायत की जाएगी।


