डोंगरगढ़ के घने जंगल, जो छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमाओं पर फैले हुए हैं, अपनी जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध हैं। हाल ही में इस क्षेत्र में बाघ के पंजों के निशान मिलने से वन विभाग और शोधकर्ताओं में हलचल मच गई है। इन निशानों को प्रकृति शोध और संरक्षण सोसाइटी के सदस्यों ने देखा और तुरंत वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पंजों के निशानों को प्लास्टर ऑफ पेरिस से संरक्षित किया और उन्हें विस्तृत जांच के लिए भेज दिया। शुरुआती स्टडी के अनुसार, ये निशान एक वयस्क मादा बाघ के हो सकते हैं। प्रकृति शोधकर्ता प्रतीक ठाकुर का कहना है कि यह क्षेत्र लंबे समय से बाघों के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि यह इलाका मैकल पर्वत श्रेणी का हिस्सा है और बाघों के प्रजनन (ब्रीडिंग) सीजन के चलते हालिया गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे पहले भी यहां बाघों के पगमार्ग देखे गए हैं, जो इस क्षेत्र को उनके नियमित आवागमन का हिस्सा साबित करते हैं। प्रतीक ठाकुर ने यह भी बताया कि बाघों के भोजन के लिए हिरण और अन्य शिकार जानवरों की पर्याप्त संख्या बनाए रखना जरूरी है। यदि बाघों को भोजन की कमी होती है, तो वे गांवों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ जाएगी। वन विभाग और विशेषज्ञों का मानना है कि त्वरित और ठोस कदम उठाकर इस क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन को संरक्षित किया जा सकता है। यह न केवल बाघों के लिए बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बाघ के पंजों के निशान मिलने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह क्षेत्र बाघों के आवागमन और संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय रहते यदि इन सुझावों पर अमल किया जाए, तो डोंगरगढ़ और आसपास के जंगल बाघों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बन सकते हैं। बाघों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदम- 1. गश्त बढ़ाई जाए: क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए।
2. कैमरा ट्रैप और निगरानी उपकरण: संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी और ट्रैप कैमरे लगाए जाएं।
3. ग्रामीणों की भागीदारी: स्थानीय लोगों को बाघों की सुरक्षा और संरक्षण में जागरूक और शामिल किया जाए।
4. अवैध गतिविधियों पर रोक: जंगल में शिकार, लकड़ी कटाई और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों को सख्ती से रोका जाए।
5. विशेष बाघ सुरक्षा बल: बाघों की सुरक्षा के लिए एक विशेष वन्यजीव सुरक्षा बल नियुक्त किया जाए।
6. संरक्षित क्षेत्र घोषित करना: इस इलाके को संरक्षित क्षेत्र या सेंचुरी घोषित किया जाए।


