सरकारी स्कूलों को मर्ज करने के मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा और जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। डोटासरा ने लिखा- शिक्षा प्रणाली में सुधार, नवाचार और विस्तार करने की जगह भाजपा सरकार हमेशा स्कूलें बंद करने का काम करती हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में एक भी बालिका स्कूल को बंद नहीं किया। जबकि भाजपा सरकार 1 साल में 450 स्कूलों को बंद कर चुकी है। डोटासरा ने लिखा- महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के नाम पर बालिका स्कूलों को बंद करने का आरोप लगाने वाली भाजपा सरकार खुद बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालयों पर ताला लगा रही है। डोटासरा ने लिखा- वसुंधरा सरकार ने समन्वय के नाम पर 22,204 स्कूलों को बंद किया
डोटासरा ने लिखा- सरकारी स्कूलों को बंद करना भाजपा की हमेशा से नीति रही है। पूर्व में भी वसुंधरा राजे सरकार ने समन्वय के नाम पर 22,204 स्कूलों को बंद किया था। जबकि हमारी सरकार ने इन बंद स्कूलों को फिर खोला और 1500 से अधिक को हिन्दी माध्यम में और 367 स्कूलों को महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम में फिर से शुरू किया। चाहे बालिका विद्यालयों को बंद करना हो या समीक्षा के नाम पर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों पर कैंची चलाने की तैयारी, भाजपा का असल उद्देश्य शिक्षा को निजी हाथों में सौंपने का रहा है। डोटासरा ने लिखा- RSS के एजेंडे के तहत गरीब कमजोर व पीड़ित के बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित रखना, आदर्श विद्या मंदिर स्कूलों को स्थापित करना भी इनकी मंशा रही है। सशक्त शिक्षा प्रणाली की जगह आज प्रदेश के सरकारी स्कूलों को गर्त में धकेला जा रहा है। कम नामांकन, स्कूलें बंद करना, शिक्षकों की नियुक्ति रोकना, अंग्रेजी शिक्षा की समीक्षा करना, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट जारी नहीं करना, छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म नहीं देना, स्कूलों में वार्षिक उत्सव नहीं कराना और उत्कृष्ट बच्चों को पुरस्कृत करने से वंचित रखना भाजपा सरकार की नई नीति बन गई है। जूली बोले- शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना चाहती है भाजपा सरकार, यह RSS- BJP का एजेंडा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- भाजपा सरकार ने एक साल में 450 स्कूलों को बंद कर दिया है। इससे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे और उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। भाजपा सरकार का असली उद्देश्य शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना है, जो कि RSS के एजेंडे के तहत है। वे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रखना चाहते हैं।


