डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन : रूट प्लान बनने में लगेगा डेढ़ माह, अभी मर्जी से पहुंच रही गाड़ियां

शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए 85 वार्डों का वार्डवाइज रूट प्लान फाइनल करने में करीब डेढ़ माह का समय लगेगा। फिलहाल रूट प्लान तय न होने के कारण गाड़ियां कूड़ा उठाने के लिए फिक्स दिन नहीं पहुंच पा रही हैं। यह मनमर्गाजी से इलाकों में जा रही हैं। यानि यदि सोमवार को कूड़ा घरों से उठाया जाना है तो सेम डे गाड़ियां नहीं जाती। 2 या 3 दिन का गैप भी हो जाता है। वहीं, रूट तय होने के बाद हर हफ्ते निर्धारित किए गए दिन पर कूड़ा उठने लगेगा। दरअसल, पुरानी कंपनी अवर्डा ने किस रूट प्लान के तहत कूड़ा कलेक्शन कर रही थी , इसकी डिटेल नई कंपनी को नहीं मिल पाई है। ऐसे में नए सिरे से तैयारी करनी पड़ रही है। हरेक गली के स्टार्टिंग प्वाइंट से एंड प्वाइंट की लोकेशन गूगल मैप में डालनी होती है जिसमें ज्यादा समय लगेगा। टेक्निकल टीमें काम में लगी हुई हैं। यदि पुराना रूट प्लान मिल जाता तो यह मुश्किलें नहीं आती। मेयर जतिंदर सिंह भाटिया ने कहा कि कंपनी की ओर से कराए जा रहे सभी कामों की रिपोर्ट ले रहे हैं। निगम अफसरों को मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। शहर में सफाई को लेकर काफी सुधार देखने को मिला है। जो काम पेंडिंग हैं, उन्हें तेजी से पूरा कराने के निर्देश देंगे। जल्द ही अफसरों की मीटिंग बुलाकर प्लान तैयार करेंगे कि कैसे तेजी से बचे कामों को पूरा कराया जा सकता है। गाड़ियां लगभग सारे वार्डों को कवर कर चुकी हैं। जो भी खामियां होंगी उन्हें दूर कराएंगे। एक मिनी टिप्पर रोजाना 1300 घरों को कवर करके कूड़ा उठा रहा है। 240 गाड़ियां व 50 इलेक्ट्रिक गाड़ियां आने के बाद पूरी क्षमता से काम शुरू होने के बाद कूड़ा उठान को लेकर जो भी मुश्किलें अभी आ रही वह पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। कंपनी की तरफ से कूड़ा उठान को लेकर करीब 750 मुलाजिमों का बड़ा स्टॉफ तैनात किया जा चुका है। .हेल्पलाइन नंबर जारी हो चुका है। .नई-पुरानी 240 गाड़ियां कूड़ा उठाने को लगाई जा चुकी हैं। .74 वार्डों से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाया जा रहा। .घरों में क्यूआर कोड लगाने का काम एक जनवरी से चल रहा है। .कूड़ा उठान को लेकर स्टॉफ रखा जा चुका है। सड़कों से कूड़ा उठाने के लिए 150 ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाई जा चुकीं। .गाड़ियों में जीपीएस लगाना शुरू किया जा चुका है। .कंट्रोल रूम का सेटअप फाइनल नहीं किया जा सका है। .50 इलेक्ट्रिक गाड़ियों के अलावा, 40 अन्य गाड़ियां अभी नहीं आ सकी हैं। .घरों से कूड़ा उठाने के लिए रूट प्लान तैयार नहीं किया जा सका जिससे निर्धारित डे-प्लान अनुसार गाड़ियां पहुंच सकें। 240 में से 70 गाड़ियों में जीपीएस लगाया जा चुका है। इसके अलावा 5 जोनों में गाड़ियों की मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम में एलईडी स्क्रीन व स्टॉफ की तैनाती होगी। बता दें कि शहर से रोजाना 700 टन कूड़ा कंपनी उठाकर भगतांवाला डंप पहुंचा रही है। निगम की बिल्डिंग के कमरा नंबर 106 में कंट्रोल रूम का सेटअप तैयार करने को लेकर कंपनी को चाबी सौंप दी गई है। जहां से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों पर नजर रखी जाएगी। जिसके लिए 5 बड़ी एलईडी स्क्रीन कंट्रोल रूम में लगाई जाएगी। साथ ही 5 कर्मचारी तैनात किए जाएंगे जो यह देखेंगे कि गाड़ियां सही रूटों पर कूड़ा उठा रही हैं या नहीं। वहीं, सभी के ऊपर हैड होगा तो सभी जोनों की गतिविधियों पर नजर रखेगा और रिपोर्ट तैयार कर कंपनी के उच्च अफसरों को सौंपेगा। गाड़ियों में लगे जीपीएस से टीम को पल-पल की अपडेट मिलती रहेगी। अगले हफ्ते तक कंट्रोल रूम के जरिए एक्टिविटी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा 400 मैन्युअल रिक्शा जो लगाए जा चुके उनके जरिए कूड़ा उठाने की डिटेल ऑफलाइन मेंटेन की जाएगी। कूड़ा उठाने वाले मैन्युअल रिक्शा चालाकों को बता दिया जाएगा कि किस दिन कौन से वार्ड के किस गली व घरों में जाना होगा। हफ्तावार रूट तय किए जाने के बाद उसी रूटीन पर कूड़ा उठाने पहुंचेंगे। बता दें कि 240 गाड़ियां, 50 इलेक्ट्रिक गाड़ियां और 900 मैन्युअल ई-रिक्शा लगाने का काम साढ़े 3 माह बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। जिस तरह से तैयारियां चल रही साराकुछ फाइनल होने में पूरा मार्च निकल जाएगा।

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