डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन प्रोजेक्ट का विरोध, शहर की सफाई रुकी

भास्कर न्यूज | जालंधर सोमवार को शहर के बड़े हिस्से में कूड़ा नहीं उठा। बरसात के बाद एक तरफ जालंधर सिटी की सड़कें टूटी हैं। जगह-जगह कीचड़ है। कूड़े के वैध और अवैध डंपों में कचरा बिखरा पड़ा है। दूसरी तरफ नगर निगम और मुलाजिमों के बीच मामला गर्म है। नगर निगम प्राइवेट सेक्टर के जरिए डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन आरंभ कराना चाहता है। जबकि मुलाजिमों ने इसका विरोध किया है। मुलाजिम यूनियनों ने सुबह ही ट्रक और जेसीबी मशीनें प्रभु श्री राम चौक में खड़ी कर दीं और प्राइवेट सेक्टर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट का विरोध किया है। प्रदर्शन में विभिन्न यूनियनों ने शमूलियत की है। संगठनों ने वरिष्ठ नेताओं बंटू सभ्रवाल, रिंपी कल्याण, मनीष बाबा, बाबा राज किशोर सहित तमाम नेताओं की अगुवाई में प्रदर्शन किया। संगठनों का कहना है कि नगर निगम ने 143 करोड़ रुपए का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट बनाया है। सरकार प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दे रही है। जबकि आप सरकार ने ठेकेदारी प्रथा को रोकने का वादा किया था। उधर, कूड़ा न उठने से प्रताप बाग, मच्छी मार्केट, जीटी रोड, नकोदर रोड आदि पर कूड़े के ढेर लग गए। बारिश के सीजन के बीच सफाई ठप रही है। हालात ये हैं कि डीएवी कॉलेज ब्रिज, मकसूदां ब्रिज, संविधान चौक ब्रिज की दीवारों के साथ कूड़े के ढेर लगे हैं। उधर, निगम यूनियनों के डेलीगेशन ने सेंट्रल विस हलका प्रभारी नितिन कोहली को अपनी मांगों प्रति वाकिफ कराया। इसके बाद मेयर वनीत धीर और निगम कमिशनर संदीप ऋषि के साथ मुलाकात की। उन्होंने मुलाजिमों की मांगें सुनी। साथ ही भरोसा दिया कि मुलाजिमों के हित सबसे ऊपर हैं। वहीं, मुलाजिम संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें न मानी गई तो आंदोलन तीखा करेंगे। निगम पहले भी बना चुका ऐसा प्रोजेक्ट अभी तक केवल डंप खाली करने की व्यवस्था निगम देखता है। घरों-दुकानों के अंदर का कूड़ा लोग रैग पिकर्स को देते हैं। रैग पिकर्स के साथ पूरा शहर नहीं जुड़ा है। बड़ी गिनती में लोग खुली रोड्स पर कूड़ा फेंकते हैं। ऐसे में कूड़ा की सेग्रीगेशन भी नहीं हो पाती। ऐसे में घर से ही कूड़ा उठाने की व्यवस्था पर जोर दिया जाता है। साल 2015-16 में भी निगम ने प्रोजेक्ट बनाया था। उस समय लोकलबॉडीज मंत्री अनिल जोशी थे जबकि सुनील ज्योति मेयर। सरकार अकाली-भाजपा की थी। उस समय मॉडल सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट बनाया गया था। घर-घर से कूड़ा उठाने के बदले में प्राइवेट कंपनी को टिपिंग चार्जेज देने थे। लेकिन मुलाजिम संगठनों के तीखे विरोध के कारण प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा था। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी ने जालंधर में दफ्तर बना लिया था। आधुनिक मशीनरी भी ले ली थी। सारा प्रोजेक्ट ठप हो गया। अब दूसरी पार इसी तरह का मिलत-जुलता प्रोजेक्ट बनाया है। फिलहाल टेंडरिंग प्रोसेस चल रहा है।

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