ATS और ANTF की टीम ने एमडी का कारोबारी एक लाख रुपए का इनामी तस्कर को पश्चिम बंगाल के कोलकता से पकड़ा है। आरोपी की उम्र 31 साल है लेकिन मुकदमे इससे ज्यादा दर्ज है। पांच राज्यों का वांटेड है। पुलिस और टीमों से बेचने के लिए नाम बदलने के साथ-साथ 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों की यात्रा की। महाराष्ट्र जेल में डॉ. बिरजू से संपर्क में आने के बाद एमडी कारोबार शुरू किया। जोधपुर और बाड़मेर में एमडी फैक्ट्री लगाने मुख्य सूत्रधार है। 1 किलो एमडी बनाने में 1 लाख की लागत में 30 लाख रुपए का मुनाफा कमाते। आईजी विकास कुमार ने बताया- एटीएस और एएनटीएफ को सूचना मिली कि तस्कर रमेश राज्य से बाहर कोलकता में जाकर अपना नशे का कारोबार शुरू करने की फिराक में है। केमिकल सप्लाई कर्ता पुणे, मुंबई और उसके आसपास इलाके में होने की सूचना थी। माल सप्लाई के लिए रमेश खुद हवाई जहाज से पुर्ण जाया करता है। हवाई यात्रा कर जनवरी में दो बार गया कोलकता टीम ने हवाई यात्रा की टिकटों की लगातार गहनता से जांच की गई। रमेश स्वंय के नाम पर जनवरी के फर्स्ट वीक में कोलकता से पुणै और दूसरे वीक में वापस कोलकता आया है। फिर टीम कोलकता में जाकर स्थापित हो गई। नहीं करता है मोबाइल यूज शातिर रमेश न तो राजस्थान में किसी के सीधे संपर्क में था न ही किसी भी प्रकार को मोबाइल यूज कर रहा था। इससे उसका ठिकाना पता करने में बड़ी दिक्कत हुई। जांच में सामने आया कि रमेश के रिश्तेदार की हावड़ा और कोलकता में स्टीम की दो दुकानें है रमेश का वहां अकसर आना-जाना रहता है। ऐसे में जगदम्बा स्टीम नाम की हावड़ा में स्थापित दुकान पर निगरानी रखनी शुरू की। दुकान के पास किराए पर रुकी टीम, दुकान के लड़कों से की दोस्ती एएनटीएफ की टीम हावड़ा में दुकान के पास किराए का रूम लेकर रुक गई। टीम ने राजस्थान से काम की तलाश में कोलकता आना बताकर दुकान में काम करने वाले लड़कों से दोस्ती की। टीम ने हावड़ा और कोलकता के नई टाउन दोनों ही इलाकों में मजदूरी करना शुरू किया। बातों बातों में मिला रमेश का क्लू एएनटीएफ टीम मजदूरी करने के दौरान बातों ही बातों में दुकान के एक वर्कर ने कहा रमेश को धार्मिकता सवार हे और वह धर्म स्थलों की लगातार यात्राएं कर रहा है। गंगासागर भी जाने वाला है। वहां से ट्रेवल एजेंट का नाम पता भी मिल गया। टीम ट्रैवल एजेंट को लिया काबू में एएनटीएफ की टीम गंगासागर यात्रा की इच्छुक बनकर ट्रेवल एजेंट के संपर्क में आ गई। उसे अपने काबू में कर लिया। थोड़ी पूछताछ में ही उसने रमेश का भी टिकट सड़क मार्ग से गंगासागर होने की बात बताई। यह भी बताया कि उसकी पत्नी रमेश के घर पर उसके लिए खाना बनाने का काम करती है। हावड़ा पुलिस की मदद से रमेश को ठिकाने से दबोच लिया। केमिस्ट्री का टीचर और केमिकल्स का कारोबारी बन छुपा रमेश ने इलामें में खुद को केमिस्ट्री का टीचर और हाल में केमिकल्स का व्यापारी बता रखा था। केमिकल कारखाना लगाने के लिए जगह की तलाश के लिए कोलकता आना बताया। अपार्टमेंट के लोग बड़ा व्यापारी समझते थे। फरारी में 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों की यात्रा रमेश ने पुलिस और एजेसियों से बचने के लिए राज्य के बाहर फरारी काट रहा था। पकड़े जाने से बचने और कुछ प्रायश्चित के नाम पर रमेश ने सभी 12 ज्योतिलिंगों और चारों धामों की परिक्रमा कर ली। पकड़े जाने के कुछ दिन पहले ही वह जगन्नाथपुरी से घूमकर आया था। उम्र से ज्यादा मुकदमे आरोपी रमेश की उम्र 31 साल है लेकिन उस पर कुल मुकदमें करीब तीन दर्जन के आसपास है। राजस्थान में करीब 15-17, गुजरात में 8, तेलंगाना में 3 महाराष्ट्र में 2 और कर्नाटक में 1 मामला दर्ज होना आरोपी खुद ने कबूल किया है। जिसका वेरिफिकेशन किया जा रहा है। 8 सालों से ड्रग्स का कारोबार कर रहा है। जोधपुर और बाड़मेर में पकड़ी थी फैक्ट्रियां हाल ही के दिनों में पश्चिमी राजस्थान में एमडी की फैक्ट्रियां पकड़ी गई थी। इस गँग का सरगना रमेश था। पकड़ी फैक्ट्रियों में जोधपुर के कुड़ी भगतासनी, बाड़मेर के सेवाड़ा में फैक्ट्री पकड़ी गई थी। वहीं सिरोही में पकड़ी गई फैक्ट्री का कर्ता-धर्ता भी रमेश का ही गैंग थी। एक लाख की लागत से 30 लाख एमडी आईजी ने बताया रमेश एमडी बनाने का नया और सस्ता फार्मूला महाराष्ट्र से सीखकर आया। इस फार्मूला में ब्रोमो, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, टार्लबन और एथिल अल्कोहल को मिलाकर केमिकल प्रक्रिया से एमडी बनाई जाती है। इस प्रोसेस में 5-7 दिन लगते है। एक किलो एमडी बनाने में एक लाख रुपए की लागत लगती थी। जिसकी बाजार कीमत 30 लाख रुपए आंकी जाती है। महाराष्ट्र जेल में सरगना डॉ. बिरजू के आया संपर्क में महाराष्ट्र की जेल में सरगना डॉ. बिरजू के संपर्क में आने के बाद रमेश एमडी बनाने का अवैध कारोबार शुरू किया। पहले तो महाराष्ट्र के खुदरा में एमडी बनाकर राजस्थान में सप्लाई करता था। मुनाफे को बढ़ाने के लिए उसने स्वंय एमडी की फैक्ट्री लगाने का काम शुरू किया। सहयोगियों और पार्टनर के साथ उनकी जमीन और मकान मे कारखाना स्थापित करवाता था। डॉ. बिरजू के जरिए केमिकल एक्सपर्ट आते थे। मुंबई महिला के जरिए मुंबई-पुणे और गुजरात में कैमिकल आता था। पुलिस से बचने के लिए बदले नाम शातिर रमेश ने पुलिस से बचने के लिए बहुरूपिया बन गया। अपने अलग-अलग नाम रखता था। कहीं व रामेश कहीं रामलाल कहीं अनिल तो कहीं कुछ और नाम रखकार कारोबार करता था। रमेश पुत्र सोहनलाल निवासी शिव मंदिर के पास, नेडी नाडी पुलिस धोरीमन्ना जिला बाड़मेर एमडी कारोबार का सूत्रधार था। साथ वाहन चोरी, शराब तस्करी, मारपीट, लूट फिरौती के लिए किडनैप का भी सरगना रहा है। भंवरी देवी कांड सूत्रधार बिश्नाराम का करीबी आईजी ने बताया कि रमेश के अपराधों की शुरुआत वाहन चोरी के कारोबार से हुई। बिश्नाराम जो एक बड़े अपराधिक गैंग का सूत्रधा रहा है, रमेश ने दर्जनों चोरी की गाड़ियां, अवैध शराब के परिवहन और नशे के कारोबार के लिए सप्लाई की। बाद कारोबार बढ़ा लेने के बाद बिश्नाराम से संबंध तोड़ खुद सरगना बन गया। 12वीं कर शौक के लिए चुराई गाड़ियां रमेश 12वीं करने के बाद शौक पूरे करने के लिए पहले गाड़ियां चुराता था। फिर उसे ही कमाई का धंधा बना दिया। सैकड़ों वाहन चोरी कर तस्करों को बेचकर अच्छी खासी कमाई की। वहां से फिर शराब तस्करी में कूद गया। इस दौरान महाराष्ट्र जेल में एमडी के धंधेबाज डॉ. बिरजू से मुलाकात हुई। वहां से एमडी कारोबार शुरू किया। रमेश के धोरीमन्ना में मार्बल फैक्ट्री, कार डेकॉर दुकान पुलिस सूत्रों ने बताया कि रमेश ने धोरीमन्ना में मार्बल की बड़ी फैक्ट्री लगवा रखी है। साथ कार डेकॉर के नाम से भी उसने दुकान खुलवा रखी है। फार्म हाउस और दुकानें होना भी सामने आया है।


