ड्राइवर ने स्टेशन पर सिग्नल नहीं देखा, स्टॉपेज में ठोका इंजन

भास्कर न्यूज | अमृतसर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार शाम बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर 1-ए पर शंटिंग के दौरान एक इंजन सीधे स्टॉपेज (ठोकर) से टकरा गया, जिससे स्लीपर और सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि हादसे के वक्त दीवार के आसपास कोई यात्री मौजूद नहीं था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इंजन ड्राइवर की लापरवाही के कारण हुआ। प्लेटफॉर्म पर तैनात प्वाइंटमैन ने इंजन ड्राइवर को हरी झंडी दिखाकर रुकने का इशारा किया लेकिन ड्राइवर ने संकेतों को नजरअंदाज कर दिया और इंजन को सीधे ठोकर पर चढ़ा दिया। जब प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों ने शोर मचाया तब ड्राइवर ने ब्रेक लगाए। पठानकोट से अमृतसर आने वाली रावी एक्सप्रेस (14632) शाम करीब 4.30 बजे स्टेशन पर पहुंची थी। करीब 5 बजे ट्रेन से इंजन को अलग कर प्लेटफॉर्म नंबर 1-ए पर शंटिंग की जा रही थी इसी दौरान यह घटना घटी। हैरानी की बात यह रही कि घटना के तुरंत बाद रेलवे के किसी वरिष्ठ अधिकारी को इसकी सूचना नहीं दी गई। आनन-फानन में ड्राइवर ने इंजन को पीछे हटा लिया और मौके पर कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि लगभग 2 घंटे बाद फिरोजपुर रेलवे डिवीजन के अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। घटना के बाद इंजन ड्राइवर की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों का कहना है कि यदि समय रहते ब्रेक न लगाई जाती, तो इंजन प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर स्टेशन परिसर में भी घुस सकता था, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद यात्रियों में दहशत का माहौल रहा और रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। यात्रियों का कहना है कि इंजन ड्राइवर की लापरवाही के कारण हादसा हुआ है। इंजन ड्राइवर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि आगे ऐसी लापरवाही से होने वाले हादसों पर रोक लग सके। रेलवे में स्टॉपेज को आम भाषा में ठोकर कहा जाता है। यह प्लेटफॉर्म या ट्रैक के अंतिम छोर पर लगाई जाने वाली सुरक्षा संरचना होती है, जिसका काम ट्रेन या इंजन को पटरी के अंतिम सिरे से आगे जाने से रोकना होता है। यह लोहे, कंक्रीट या भारी स्टील से बनी होती है और टक्कर की स्थिति में इंजन की गति को रोकने या कम करने के लिए बनाई जाती है ताकि बड़ा हादसा न हो। ठोकर (स्टॉपेज) का मुख्य उद्देश्य ट्रेन को पटरी से आगे निकलने से रोकना, यात्रियों और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करना, प्लेटफॉर्म, स्टेशन परिसर और आसपास के इलाकों को हादसों से बचाना, शंटिंग के दौरान इंजन की ओवरस्पीड को रोकना होता है। रेलवे के अनुसार इंजन ड्राइवर और स्टाफ को ठोकर के पास विशेष सावधानी रखनी होती है। ठोकर के पास ट्रेन की स्पीड बहुत कम (आमतौर पर 5-10 किमी/घंटा से कम) रखनी होती है। शंटिंग करते समय ड्राइवर को प्वाइंटमैन के इशारों का पालन करना जरूरी होता है। हरी या लाल झंडी के संकेतों को नजरअंदाज करना गंभीर नियम उल्लंघन माना जाता है। नियमों के मुताबिक इंजन को ठोकर से करीब 20 मीटर की दूरी पर रोकना होता है, लेकिन उक्त ड्राइवर इंजन को ठोकर पर लगे सिग्नल तक ही ले गया।

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