चूरू डीटीओ ऑफिस में हैवी व्हीकल के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। इस ऑफिस से चार साल में हरियाणा के 1307 लोगों को हैवी व्हीकल लाइसेंस जारी किए गए और चौंकाने वाली बात यह है कि सभी को एक ही एड्रेस पर जारी कर दिया गया। भास्कर ने जब मामले में पड़ताल की, तो सामने आया कि 2021 से 2024 तक यह फर्जीवाड़ा किया गया और जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर कड़वासर गांव में सभी 1307 ड्राइवरों का एड्रेस बताया गया। इस दरमियान ओमसिंह शेखावत 2022 से 2024 तक डीटीओ थे। वे फिलहाल जालोर के भीनमाल में पोस्टेड हैं। लाइसेंस जारी करते समय इंस्पेक्टरों ने न तो टेस्ट लिया और न ही ड्राइवरों के एड्रेस को वेरिफाई किया। दस्तावेजों की पूरी जांच भी नहीं की गई। सिर्फ शपथ पत्र के भरोसे जारी कर दिए लाइसेंस हरियाणा में हैवी व्हीकल लाइसेंस के लिए नियम काफी कठोर हैं। वहां ट्रेनिंग के बाद ही यह लाइसेंस मिलता है। पड़ताल में सामने आया कि दलालों के जरिये इन सभी लोगों ने डीटीओ ऑफिस में शपथ पत्र पेश किया। इसमें बताया कि वे हरियाणा के स्थायी निवासी हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से कड़वासर गांव में रह रहे हैं। तत्कालीन डीटीओ ने साइन करते हुए लाइसेंस जारी कर दिए। ये अब देश में हर जगह मान्य हैं। कड़वासर निवासी बोले—ये हमारे गांव में नहीं रहते हैं भास्कर की टीम कड़वासर गांव पहुंची। निवासियों से बात की, तो सामने आया कि दस्तावेजों में इस गांव का एड्रेस देकर लाइसेंस लेने वाले लोग यहां रहते ही नहीं हैं। रिपोर्टर ने गांव के मुख्य चौराहे, दुकानों पर पहुंचकर ग्रामीणों से पूछा। लोगों को लाइसेंस लेने वाले ड्राइवरों के नाम बताए, ग्रामीण बोले कि ये लोग न तो कभी गांव में बसे और न कभी यहां किराये पर रहे। इन उदाहरणों से समझें, सभी के एड्रेस में गांव का नाम, मकान नंबर कहीं नहीं अधिकारी क्या बोले “सेल्फ डिक्लेरेशन को अमान्य करने का हमारे पास कोई आधार नहीं रहता है। अभ्यर्थी शपथ पत्र में एड्रेस लिखकर देता है। हमने उसी एड्रेस पर लाइसेंस जारी किए थे।” -ओमसिंह शेखावत, तत्कालीन चूरू डीटीओ “एक ही गांव के एड्रेस पर 1307 हैवी व्हीकल लाइसेंस जारी होना चौंकाता है। ये कैसे जारी हुए, इसकी जांच करवाएंगे।” -मथुराप्रसाद मीणा, आरटीओ सीकर


