नर्मदापुरम जिले के केसला ब्लॉक के ग्राम टांगना में आदिवासियों के मकान तोड़ने के विरोध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट गेट का घेराव हुआ। करीब ढ़ाई घंटे तक प्रशासन से न्याय व पुनर्वास की उम्मीद में आदिवासी महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चें कलेक्ट्रेट गेट पर बैठे रहे। प्रदर्शन की वजह से लोगों को आने-जाने में अधिकारी-कर्मचारी और आम लोगों को परेशानी हुई। कलेक्ट्रेट के पीछे वाला गेट खोलकर लोगों और कर्मचारियों की आवाजाही कराई गई। इधर, महिला पुरुष ने मकान तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने और नया मकान बनाकर देने की मांग की। दोपहर 3 बजे से 5.30 बजे तक सभी आदिवासी कलेक्ट्रेट गेट को घेरकर बैठे रहे। इस बीच गेट पूरी तरह से बंद रहा। भारी पुलिस फोर्स के साथ बेरिकेडिंग की गई। सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार सरिता मालवीय, कोतवाली टीआई कंचन सिंह ठाकुर ने लोगों को मनाने की कोशिश की लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। पीड़ित एक बच्ची ने रोते हुए कहा पुलिस और सरपंच ने हमारे मकान जेसीबी से ढहा दिए हमें बेघर किया गया। अब हम कड़कड़ाती ठंड में खुले में रहने को मजबूर है। जमीनी विवाद में कोर्ट के आदेश पर ढहाए मकान
जमीन के पारिवारिक विवाद के मामले में कोर्ट के आदेश पर प्रशासन द्वारा पांच मकानों को हटाया। कार्रवाई में आदिवासी गरीब परिवारों के मकान टूट गए जिससे परिवारों का पूरा सामान मलबे के नीचे दब गया। कड़कड़ाती ठंड में छोटे-छोटे बच्चों सहित पूरा परिवार रातभर खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हो गए है। पीड़ित परिवार की मनोता बाई कलमे, किसानलाल कलमे, अभेराम दास कलमे, रामदास कलमे का कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया, अचानक प्रशासनिक दल पहुंचा और घर तोड़ना शुरू कर दिया। परिवारों ने बताया कि आटा, अनाज, कपड़े, गेहूं, मक्का, आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज तक बाहर निकालने नहीं दिए, जिससे सब मलबे में दब गया। पीड़ित परिवार अपनी समस्या लेकर एसडीएम से मिलने पहुंचे। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे तीन पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। आरोप- पीएम आवास के तहत बने मकान भी तोड़े
टूटे मकानों में से कुछ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी बने थे। अंजली कलमे ने बताया मैं 9 दिसम्बर को स्कूल गई। जब घर लौटी तो मकान टूटा फूटा था। सारा गृहस्थी का सामान मलबे में दबा हुआ था।पुलिस वालों ने हमें कहा कि अंदर मत जाओ। इतना कहकर बिटिया अंजली फूट-फूटकर रोने लगी। उसने कहा प्रधानमंत्री आवास योजना से कुछ महीने पहले ही मकान बना था। इससे पहले जब सीमांकन करने प्रशासन के अधिकारी आएं थे तब हमारे घर के सदस्यों ने विरोध किया था। जिसके बाद पापा समेत अन्य सदस्यों को जेल भेज दिया गया है। आदिवासी परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है, वे प्रशासन से न्याय व पुनर्वास की उम्मीद कर रहे हैं। इसी उम्मीद के साथ शुक्रवार को सभी कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंचे थे। सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि इटारसी सब डिविजन का मामला है। मुझे ज्यादा तो नहीं पता, पर कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई। पीड़ित परिवार द्वारा ज्ञापन दिया है।


