एक समय था जब गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेजों में प्रवेश की लंबी वेटिंग रहती थी। अब हालात उलट हैं। प्रदेश के 72 पॉलिटेक्निक (डिप्लोमा इंजीनियरिंग) गवर्नमेंट कॉलेजों में 33% सीटें खाली हैं। इसकी वजह है- बिना सर्वे व जरूरत कहीं भी खोले गए पॉलिटेक्निकल कॉलेज, कमजोर प्लेसमेंट और काउंसिलिंग में देरी। स्थिति ये है कि तकनीकी शिक्षा संचालनालय को निर्देश देने पड़े कि 9वीं-10वीं पढ़ रहे स्कूली बच्चों को संस्थान का भ्रमण करवाएं ताकि उनका रुझान वापस डिप्लोमा इंजीनियरिंग की तरफ बढ़े। पॉलिटेक्निक में कोविड से पहले तक प्रवेश पीपीटी (प्री-पॉलिटेक्निक टेस्ट) से होते थे, जो अब बंद कर दिए। अब 10वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन हो रहे हैं। इस साल भी लंबे इंतजार व काउंसिलिंग के कई चरणों के बाद भी करीब एक तिहाई सीटें खाली हैं। इस साल काउंसिलिंग 27 जुलाई 2024 से शुरू हुई, जबकि 10वीं का रिजल्ट 24 अप्रैल 2024 को ही आ चुका था। इसे 23 अक्टूबर तक बढ़ाया गया, लेकिन छात्र नहीं मिले। काउंसिलिंग लेट होने का परिणाम यह रहा कि कई बच्चों ने दूसरे रेग्युलर कोर्सेस में एडमिशन ले लिया। 5 साल पहले तक 15 अगस्त तक सारे एडमिशन हो जाते थे। पॉलिटेक्निक कॉलेज में एडमिशन न होने के 5 बड़े कारण सामने हैं। पहला तो ये है कि पिछले कुछ सालों में बिना सर्वे व इंडस्ट्री के कई स्थानों में पॉलिटेक्निक कॉलेज खोल दिए। इन क्षेत्रों में न कोई इंडस्ट्री है न टेक्निकल वर्कफोर्स की डिमांड इसलिए काेर्स के बाद रोजगार नहीं है। दूसरा बेतहाशा निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खुलने से अभिभावक बच्चों को डिप्लोमा की बजाय डिग्र्री कोर्स में भेज रहे हैं। पॉलिटेक्निक की तरफ रुझान कम होने का एक बड़ा कारण प्लेसमेंट की कमी भी है। एडमिशन लेने से पहले छात्र कॉलेज की प्लेसमेंट हिस्ट्री जानना चाहता है। कोर्स में भी सुधार की जरूरत है। पॉलिटेक्निक कॉलेजों में प्लेसमेंट की स्थिति कमजोर है। कहीं-कहीं तो प्लेसमेंट का औसत 10% से भी कम है। छात्रों को रुपए भी कम मिलते हैं। एडमिशन कम होने की एक वजह पॉलिटेक्निक कॉलेज में ब्रिज कोर्सेस का न होना भी है। यहां ऐसे कोर्सेस चलाने की जरूरत है जाे दूसरी इंडस्ट्री के लिए सेतु का काम करें। मसलन टेली जैसे कोर्स कॉमर्स एवं फाइनेंस सेक्टर में जॉब दे सकते हैं। लटेरी में 136 सीटें, एडमिशन सात लटेरी के पॉलिटेक्निक कॉलेज की चार ब्रांच में कुल 136 सीटें हैं। यहां सिविल व इलेक्ट्राॅनिक्स ब्रांच में 1-1 व मैकेनिकल में 5 एडमिशन हुए हैं। बड़वानी में कॉलेज की 182 सीटों में से 99 खाली हैं। नसरुल्लागंज कॉलेज की 272 में 238 सीटें नहीं भरीं। श्योपुर में तो सिविल की 61 सीट पर सिर्फ 6 एडमिशन हुए। ऐसी स्थिति सनावद, नरसिंहपुर, दमोह आदि ज्यादातर कॉलेजों की है। मंत्री बोले- स्कूलों में संपर्क करवा रहे, नए कोर्स भी शुरू करेंगे ताकि बढ़े प्रवेश एडमिशन शेड्यूल एआईसीटीई तय करती है। समय पर काउंसलिंग शुरू हो इसलिए उन्हें सुझाव दिया है। अगले सत्र में सीटें खाली ना रहें, इसके लिए सभी कॉलेज प्राचार्य को निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्र के हाईस्कूल, हायर सेकंडरी स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को कोर्सेस की जानकारी दें। इसके अलावा हम इंडस्ट्री सेक्टर के साथ मिलकर नए कोर्स डिजाइन कर रहे हैं जो आज की आवश्यकता पर आधारित हैं। इसकी दो मीटिंग हो चुकी और जल्द फाइनल करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी प्राचार्य-कलेक्टर की रहती है। किसी जिले में असुविधा है तो कलेक्टर को निर्देश देंगे।
इंदरसिंह परमार, तकनीकी शिक्षा मंत्री मप्र भोपाल


