तनाव से राहत के लिए माइंड ब्रेक और तय रूटीन बेहद जरूरी

सोने और खाने का तय रूटीन बनाएं – अनियमित दिनचर्या जैसे कभी भी खाना, देर रात तक जागना और सुबह थकावट के साथ उठना तनाव का बड़ा कारण बन चुकी है। इस असंतुलन से शरीर का हॉर्मोनल सिस्टम गड़बड़ा जाता है, जिससे मूड स्विंग, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अगर आप रोज एक समय पर सोने और खाने की आदत डालें, तो शरीर एक रिदम पकड़ लेता है जो मानसिक स्थिरता को बढ़ाता है। रिसर्च के अनुसार, सिर्फ सही नींद और समय पर भोजन तनाव को 50% तक कम कर सकता है। यही दो आसान कदम दिमाग को रोज़ का संतुलन देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हर इंसान को दिन में कम से कम एक बार अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि दिमाग का स्थिर रहना ही स्वस्थ जीवन की असली नींव है। भास्कर न्यूज| लुधियाना अभी का समय जितना तेज रफ्तार है, उतना ही मानसिक रूप से थका देने वाला भी। हाल के दिनों में तनाव से जुड़ी समस्याओं के केस तेजी से बढ़े हैं। युवा ही नहीं, बच्चे, महिलाएं और यहां तक कि सीनियर सिटीजन भी मानसिक थकावट और बेचैनी महसूस कर रहे हैं। नींद न आना, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और अचानक रो देना जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। कई लोग इसका कारण निजी रिश्ते मानते हैं तो कई ऑफिस का प्रेशर, लेकिन कारण चाहे जो भी हो, अब जरूरी है तनाव को रोकना और अपने मन को ठहराव देना। तनाव हमारे समय की सबसे चुपचाप बढ़ने वाली बीमारी बन चुका है, लेकिन इसकी रोकथाम आसान है अगर हम समय रहते चेत जाएं और खुद को थोड़ी तवज्जो दें। हर दिन खुद के लिए कुछ पल निकालना और एक संतुलित रूटीन अपनाना ही आज का सबसे बड़ा समाधान है। तनाव के मामले इसलिए भी सामने आ रहे हैं, क्योंकि लोग खुद के लिए समय निकालना भूल चुके हैं। मोबाइल, मीटिंग, मेल और मन के अंदर चल रही उलझनों ने दिमाग को थकाकर रख दिया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि रोजमर्रा में कुछ छोटे बदलाव करके हम खुद को काफी हद तक शांत रख सकते हैं। हर कोई आज कुछ न कुछ वजह से तनाव में है। सबसे जरूरी है इसे सामान्य मानना और वक्त रहते खुद को ब्रेक देना। माइंड को रुकने, सोचने और फिर से सक्रिय होने का मौका दें। खुद को रोज़ थोड़ा वक्त दें यह न सेल्फिशनेस है न आलस, बल्कि मेंटल हेल्थ की जरूरत है। अगर ये छोटे कदम भी नहीं उठाए गए तो तनाव धीरे-धीरे डिप्रेशन का रूप ले सकता है। माइंड ब्रेक दिमाग को रीसेट करता है – हर दिन कुछ समय सिर्फ खुद के लिए निकालना बेहद जरूरी है। यह वक्त ऐसा होना चाहिए जब आप कोई डिवाइस न देखें, किसी कॉल का जवाब न दें और न ही किसी मीटिंग या भविष्य की प्लानिंग के बारे में सोचें। चाहे पार्क में अकेले बैठें, मेडिटेशन करें या फिर अपना पसंदीदा म्यूजिक सुनें इस माइंड ब्रेक से दिमाग को रीसेट होने का मौका मिलता है। रिसर्च बताती है कि रोजाना 30 मिनट की ऐसी मानसिक शांति तनाव के स्तर को 40% तक घटा सकती है। यह ब्रेक दिमाग की ऊर्जा को रीचार्ज करता है और भावनात्मक स्थिरता लाता है।

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