भास्कर न्यूज | राजनांदगांव छत्तीसगढ़ में तबला जगत के ध्रुवतारा फरुकाबाद तबला घराने के कला साधक ठाकुर रामनाथ सिंह के निधन से संगीत जगत को क्षति हुई है। बिहार में जन्मे ठाकुर रामनाथ सिंह ने छत्तीसगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर जीवनपर्यंत संगीत सेवा को समर्पित रहते जरूरतमंद युवाओं को निशुल्क तबला शिक्षा प्रदान की। वे केवल श्रेष्ठ तबला वादक नहीं, संवेदनाओं से परिपूर्ण गुरु थे। विद्यार्थियों को संगीत सिखाया, भोजन, आवास एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किया। 70-80 के दशक में उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में दीर्घकाल तक सेवाएं दीं। उनकी संगत की विशेषता यह थी कि तबले का प्रत्येक बोल कलाकार के गायन के साथ जीवंत हो उठता था। उनकी वादन शैली में गुरुओं उस्ताद करामतउल्ला खां साहब एवं पंडित गोविंद देशमुख की परंपरा दृष्टिगोचर होती थी। कठोर रियाज़, अनुशासन, समर्पण उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। वे भाषा और संस्कृति में अद्भुत सामंजस्य रखते थे। बिहारी और छत्तीसगढ़ी दोनों बोलियों में समान आत्मीयता से संवाद करते थे। चक्रधर कथक कल्याण केंद्र, राजनांदगांव द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सप्तरंग समारोह 2018 में तबला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राजा चक्रधर सिंह कृत ग्रंथ तालतोयनिधि सम्मान वर्तमान सांसद संतोष पाण्डेय द्वारा प्रदान किया गया।


