तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में फिर हाईलेवल ड्रामा हुआ। राज्यपाल आरएन रवि एक बार फिर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए स्पीच दिए बिना ही असेंबली से बाहर चले गए। पिछले सालों की तरह गवर्नर ने कहा कि तमिल गान के बाद राष्ट्रगान बजाया जाए। लेकिन स्पीकर अप्पावु ने इसके लिए मना कर दिया। इसके बाद गवर्नर रवि शुरुआती भाषण पढ़े बिना ही विधानसभा से बाहर चले गए। इससे पहले 2024-25 में भी वे ऐसा कर चुके हैं। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उनके भाषण में रुकावट डाली गई। उन्होंने कहा कि मैं निराश हूं। राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। गवर्नर के वॉकआउट के बाद विपक्षी AIADMK के नेता भी असेंबली से बाहर चले गए और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं तमिलनाडु CM ने इसे असेंबली का अपमान बताया है। लोक भवन बोला- गवर्नर का माइक बंद किया राज्यपाल के असेंबली से बाहर जाने के बाद लोक भवन ने प्रेस रिलीज जारी की। रिलीज में कहा गया कि एक बार फिर राष्ट्रगान का अपमान किया गया। गवर्नर का माइक बार-बार बंद किया गया। उन्हें बोलने नहीं दिया गया। CM बोले- राज्य को गवर्नर की क्या जरूरत तमिलनाडु के CM एमके स्टालिन ने कहा कि यह कदम सदन की बेइज्जती करता है और असेंबली के प्रोटोकॉल के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मैं सीएन अन्नादुराई की बात याद दिलाना चाहूंगा जिन्होंने पहले कहा था, “बकरे को दाढ़ी की क्या जरूरत है, और राज्य को गवर्नर की क्या जरूरत है। CM नेकहा कि गवर्नर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर सरकार के खिलाफ गलत कैंपेन फैला रहे हैं। विधानसभा में इसी तरह का कदम उठाने की उनकी कोशिश मंजूर नहीं है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु के 10 बिल रोकने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:राज्यपाल के फैसले को बताया अवैध, कहा- आप संविधान से चलें, पार्टियों की मर्जी से नहीं सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (8 अप्रैल) को ऐतिहासिक फैसले में राज्यपालों के अधिकार की ‘सीमा’ तय कर दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, ‘राज्यपाल के पास कोई वीटो पॉवर नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…


