तरनतारन जिले में नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, दिल्ली और पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के दिशानिर्देशों के तहत नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान कुल 10,967 मामलों में से 9,808 का निपटारा आपसी सहमति से किया गया, जिसमें ₹11,11,83,509 (ग्यारह करोड़ ग्यारह लाख तिरासी हजार पांच सौ नौ रुपए) के फैसले हुए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, तरनतारन के अध्यक्ष कंवलजीत सिंह बाजवा ने बताया कि तरनतारन सेशंस डिवीजन में बड़े पैमाने पर यह लोक अदालत लगाई गई थी। जनता की सुविधा के लिए कुल 08 बेंचों का गठन किया गया था। इसमें तरनतारन, पट्टी और खडूर साहिब के न्यायिक अधिकारी शामिल थे। इन बेंचों की अगुवाई प्रेम कुमार (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश), मनोज कुमार (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय), पंकज वर्मा (अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन), रमेश कुमार (सिविल जज जूनियर डिवीजन) और अजायब सिंह (अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत) जैसे अधिकारियों ने की। पट्टी में सिमरजीत सिंह और करनजीत सिंह (सिविल जज जूनियर डिवीजन) तथा खडूर साहिब में राजदीप सिंह मान (सिविल जज जूनियर डिवीजन) की अगुवाई में भी बेंचों ने मामलों का निपटारा किया। पीठासीन अधिकारियों ने जनता के साथ आमने-सामने बैठकर उनके विवादों को सुना और आपसी सहमति से समाधान के लिए प्रेरित किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यह भी बताया कि लोक अदालत में किसी मामले का फैसला होने पर संबंधित कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है। अदालतों द्वारा समय-समय पर प्री-लोक अदालतें भी आयोजित की जाती हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य नेशनल लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से विवादों को सुलझाना है।


