एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स राजस्थान ने आज सीकर के रींगस एरिया में मणिपुर से 1 करोड़ से ज्यादा की अफीम ला रहे 3 तस्करों को पकड़ा। तीनों ने तस्करी के बीच खाटूश्याम मंदिर में दर्शन करने का प्लान बनाया था। रास्ते में वह नहाने के लिए रुके। इसी दौरान टास्क फोर्स टीम ने उनकी तलाशी ली। आरोपियों की गाड़ी की बैक लाइट के नीचे अफीम छिपाई हुई थी। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। ANTF आईजी विकास कुमार ने बताया कि रींगस में की गई कार्रवाई में तीन आरोपी राकेश कुमार पुत्र सोहनराम निवासी खेजड़ला,राजूराम उर्फ राजू पुत्र ढगलाराम निवासी धींगाणा और शंकर पुत्र भूराराम निवासी बिसलपुर को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से गाड़ी में 20 किलो 800 ग्राम अफीम का दूध मिला है। जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 1 करोड़ से ज्यादा है। इनकी कार से असम स्टेट की नंबर प्लेट भी मिली है। तीनों आरोपी मारवाड़ में अफीम का दूध सप्लाई करने के लिए ला रहे थे। ANTF लगातार तस्करों के पीछे लगी हुई है। तीनों आरोपी इतने शातिर है कि जब राजस्थान से मणिपुर जाते थे तब अपनी गाड़ी पर असम स्टेट की नंबर प्लेट लगाते। जब इनकी चेकिंग होती तो खुद को राजस्थान का निवासी बताते और कहते कि असम में उनका बिजनेस है। इसलिए उन पर कोई भी शक नहीं करता। मणिपुर से वापस आते वक्त आरोपी राजस्थान की बजाय गुजरात की नंबर प्लेट लगा लेते क्योंकि राजस्थान के नंबरों पर शक रहता है। मणिपुर से वापस लौटते वक्त उनकी यदि कहीं पर चेकिंग होती तो आरोपी कह देते कि वह गुजरात के व्यापारी है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी हर बार बच जाते। आईजी विकास कुमार ने बताया कि इन आरोपियों को पकड़ने के लिए ANTF मणिपुर तक पहुंची। वहां पर उन्होंने अपने ह्यूमन इंटेलिजेंस सोर्स तैयार किए। इन्हीं में से एक सोर्स ने इनपुट दिया कि राजस्थान से तस्कर आए हैं जो अफीम की बड़ी डील कर रहे हैं। इस इनपुट के बाद ही ANTF उत्तर प्रदेश के पडरौना से इनके पीछे लग गई। आरोपियों ने रास्ते में कहीं पर भी अपनी गाड़ी को नहीं रोका और लगातार चलते रहे। अफीम को जोधपुर ले जाने के पहले आरोपियों ने खाटूश्याम दर्शन करने का प्लान बनाया और अपना रूट बदलकर वह रींगस पहुंचे। यहां पर आरोपियों का प्लान था कि वह नहाकर मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे। लेकिन यहीं पर ANTF इन्हें दबोच लिया। तब आरोपियों ने टीम को कहा कि वह तो बाबा के भक्त हैं और जोधपुर से आए हैं। आरोपियों ने बड़े आराम से गाड़ी की तलाशी भी करवा ली। लेकिन ANTF ने अपनी पूछताछ जारी रखी। जब ANTF के एक मेंबर गाड़ी की पिछली लाइट पर हाथ लगाया तो वह ढीली लगी। इस पर आरोपियों ने ध्यान भटकाने के लिए कहा कि लाइट टूट चुकी है। आरोपी जल्दबाजी में गेट का प्लास्टिक हटाने लगे तो ANTF को शक हो गया। जब उस लाइट को खोला गया तो अंदर पैकेट मिले। आरोपी करीब 7-8 स्टेट पार करके यह अफीम ला रहे थे। इन आरोपियों ने तस्करी के लिए एक साल में राजस्थान से असम और मणिपुर के कई ट्रिप किए। हर ट्रिप में यह करोड़ों रुपए का माल लेकर आते। इसके बदले ड्राइवर को 30 हजार रुपए हर ट्रिप के देते थे। आरोपी राकेश पढ़ाई में होशियार था। लेकिन उसका पिता नशा करने लगा था। परिवार गरीब हो गया। इसलिए राकेश ने अपनी पढ़ाई छोड़ी और फिर जोधपुर में एक दुकान पर काम करना शुरू कर दिया। यहीं पर उसकी मुलाकात स्वयंभू से हुई। और फिर राकेश तस्करी में लग गया। उसे हर ट्रिप के 30 हजार रुपए मिलते थे। दूसरा आरोपी राजूराम पहले जोधपुर एम्स में वार्ड बॉय का काम करता था लेकिन वहां जो तनख्वाह उसे मिलती वह उसके लिए काफी नहीं थी। इसलिए वह छुट्टी लेकर तस्करों के साथ शामिल हो गया और फिर नशे के कारोबार में लग गया। आईजी विकास कुमार के अनुसार इस पूरे नशे के कारोबार का मास्टरमाइंड तस्कर जोधपुर में बैठकर ही डीलिंग करता है जो थोड़े पैसों के लालच में अपने लोगों से अफीम मंगवाता है और फिर इसकी सप्लाई करता है।


