तस्करी में दोषी निकला 12वीं टॉपर…फिर भी कटघरे में पुलिस:बस से पकड़ा, FIR में लिखा श्मशान; हाईकोर्ट ने कहा-पूरा थाना दोषी, 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड

मध्यप्रदेश के मंदसौर में पकड़ा गया 18 वर्षीय छात्र सोहनलाल आखिरकार अफीम तस्करी में दोषी पाया गया है। पुलिस के पास कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और सप्लायर से जुड़े लिंक जैसे ठोस सबूत मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि युवक कूरियर बॉय के तौर पर अफीम की डिलीवरी करने आया था। लेकिन इस केस ने उतनी चर्चा तस्करी के कारण नहीं, जितनी पुलिस की गिरफ्तारी और विवेचना प्रक्रिया के कारण बटोरी। हाईकोर्ट ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि इसे सिस्टम फेल्योर बताते हुए थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। दैनिक भास्कर की यह रिपोर्ट पढ़िए… पहले देखिए दो तस्वीर… अब पूरा मामला समझिए… बस, सादी वर्दी और अचानक युवक की गिरफ्तारी
29 अगस्त 2025 की सुबह मंदसौर से प्रतापगढ़ जा रही एक बस। सादी वर्दी में मौजूद 3–4 पुलिसकर्मियों ने बस रुकते ही 18 वर्षीय सोहनलाल को नीचे उतारा। यात्रियों के मुताबिक, युवक घबराया हुआ था और उसे कुछ समझने का मौका भी नहीं दिया गया। पुलिस युवक को सीधे मल्हारगढ़ थाने ले गई। तलाशी में उसके पिट्ठू बैग से 2 किलो 714 ग्राम अफीम बरामद की गई, जिसकी कीमत करीब 5.42 लाख रुपए आंकी गई। पहले भी 6 से 7 बार मंदसौर आया था युवक
जांच में यह साफ हो गया कि सोहनलाल पहली बार मंदसौर नहीं आया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक—युवक 6–7 बार पहले भी मंदसौर आ चुका था। डोडाचूरा सप्लायर विकास चौधरी और चंद्रप्रकाश पाटीदार से करीब 500 कॉल डिटेलिंग मिली। सीसीटीवी फुटेज में दोनों के बीच अफीम डिलीवरी से पहले इशारों में बातचीत दिखी। आरोपी कूरियर बॉय के तौर पर हर ट्रिप में 5 से 10 हजार रुपए लेता था। इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने युवक को NDPS एक्ट के तहत जेल भेजा। यहां यू टर्न: FIR में लिखा श्मशान से गिरफ्तारी
ग्राउंड पर गिरफ्तारी बस से हुई, लेकिन एफआईआर में लिखा गया कि युवक को बांडा खाल चौराहा के पास श्मशान के सामने से पकड़ा गया। पुलिस का तर्क था कि बस रोकने से यात्रियों को परेशानी होती और सार्वजनिक स्थान पर हंगामा हो सकता था, इसलिए गिरफ्तारी स्थल बदला गया। लेकिन यही तर्क पुलिस पर भारी पड़ गया। हाईकोर्ट में पेश वीडियो ने खोली पुलिस की पोल
6 दिसंबर को परिजनों की ओर से हाईकोर्ट में पेश किए गए वीडियो में साफ दिखा कि युवक को बस से जबरन उतारा गया। इस वीडियो ने पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड को झूठा साबित कर दिया। हाईकोर्ट ने इसे साधारण लापरवाही नहीं माना, बल्कि कहा कि अगर कार्रवाई सही थी, तो सच छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी? कोर्ट की सख्त टिप्पणी: पूरा थाना जिम्मेदार
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह किसी एक अधिकारी की गलती नहीं, बल्कि पूरे थाने की कार्यशैली पर सवाल है। कोर्ट ने साफ कहा— “आरोपी दोषी हो सकता है, लेकिन कानून से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।” इसके बाद थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए। हाईकोर्ट ने माना- दोनों पक्षों ने सच्चाई छिपाई
सुनवाई के दौरान पुलिस ने गिरफ्तारी स्थल को लेकर गलत जानकारी दी, वहीं आरोपी पक्ष ने भी यह दावा किया कि अफीम वाला बैग मौके से बरामद नहीं हुआ। अगली सुनवाई में वही वीडियो दोबारा देखने पर बैग आरोपी के पास ही दिखाई दिया। कोर्ट ने इसे भी नोट किया कि सच्चाई दोनों तरफ से अधूरी रखी गई। कोर्ट में एसपी ने जांच प्रक्रिया में खामियां मानीं
9 दिसंबर को मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा स्वयं हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हुईं। दस्तावेजी कार्रवाई में तथ्यात्मक गलतियां हैं, हालांकि एसपी ने यह भी कहा कि आरोपी को झूठा नहीं फंसाया गया और तस्करी के सबूत ठोस हैं। एसपी से लेकर डीआईजी जांच में इन्वॉल्व
मंदसौर एएसपी मामले की जांच कर रहे हैं। इतना ही नहीं उज्जैन आईजी उमेश जोगा, रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल भी पुलिस की कार्रवाई की हर एक पहलू की गहन जांच में शामिल हैं। एक बार तो आईजी जोगा भी रतलाम में मंदसौर एसपी को बुलाकर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी ले चुके हैं। पुलिस के अनुसार, सोहनलाल ने अफीम लेने के लिए चंद्रप्रकाश पाटीदार पिता कालूराम पाटीदार ने बुलाया था, जो सीसीटीवी फुटेज में नीली टी-शर्ट में दिखाई दे रहा है। दोनों ने एक दूसरे को दूर से आंखों से इशारा किया था। विवेचना के दौरान चंद्रप्रकाश को भी गिरफ्तार किया गया था, हालांकि फिलहाल वह जमानत पर बाहर है। रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल का कहना है कि आरोपी की बेल एप्लिकेशन के दौरान कोर्ट में हुई सुनवाई में पुलिस जांच में अनियमितता पाई है। प्रथमदृष्टया आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ की तस्करी के सबूत पाए गए हैं। लेकिन कार्रवाई के दौरान कुछ त्रुटियां रही हैं। जिन पुलिसकर्मियों से त्रुटियां हुई हैं उन्हें उचित दंड दिया जाएगा। संबंधित खबर पढ़ें… 12वीं टॉपर छात्र को बनाया ड्रग तस्कर, जेल भेजा:इंदौर में बस के CCTV से पुलिस एक्सपोज मंदसौर पुलिस की ऐसी करतूत उजागर हुई, जिसे देखकर हाईकोर्ट भी सन्न रह गया। मल्हारगढ़ थाना पुलिस ने एक बेगुनाह छात्र को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ ड्रग स्मगलिंग का केस दर्ज किया और उसे जेल भी भेज दिया। जब पीड़ित छात्र के परिजन ने हाईकोर्ट की शरण ली तब कोर्ट में CCTV फुटेज और वीडियो से पता चला कि पुलिस ने झूठा केस बनाया है। पूरी खबर पढ़ें श्मशान से गिरफ्तारी का दावा, बस से उठाने का वीडियो:मंदसौर में ड्रग तस्करी केस में 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड इंदौर हाईकोर्ट में मल्हारगढ़ थाने से जुड़े NDPS मामले की मंगलवार को हुई सुनवाई में मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा स्वयं पेश हुए। कोर्ट के सामने उन्होंने स्वीकार किया कि युवक की गिरफ्तारी और जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हुई हैं। इस मामले में पहले ही 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की जा चुकी है। पूरी खबर पढ़ें

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