स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में काम दिलाने का झांसा देकर 15 करोड़ की ठगी के मामले में युवा कांग्रेसी नेता आशीष शिंदे को मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आशीष पर आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी केके श्रीवास्तव को फरार कराने में मदद की थी। पुलिस का कहना है कि आशीष न केवल आरोपी को अपनी गाड़ी में छिपाकर शहर भर में घुमाता रहा, बल्कि पुलिस की नजर से बचाने की साजिश में भी शामिल था। बता दे की इससे पहले रिमांड के दौरान पुलिस के अलावा ईडी और ईओडब्ल्यू ने भी केके श्रीवास्तव से लंबी पूछताछ की थी सोमवार को कोर्ट ने मुख्य आरोपी केके को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। कौन है आशीष शिंदे? आशीष शिंदे रायपुर का सक्रिय युवा कांग्रेस नेता है। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने आशीष को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक शिंदे के मोबाइल की कॉल डिटेल और CCTV फुटेज से यह साफ हुआ कि उसने केके श्रीवास्तव को फरारी में मदद की थी। शिंदे आरोपी को कई दिन तक अपनी गाड़ी में छिपाकर घुमाता रहा और पुलिस को गुमराह करता रहा। पुलिस अब और नामों की तलाश में इस मामले में पुलिस को शक है कि केके श्रीवास्तव के नेटवर्क में राजनीतिक और कारोबारी दुनिया के और भी लोग शामिल हो सकते हैं।पुलिस और साइबर क्राइम टीम अब केके श्रीवास्तव के मोबाइल, बैंक अकाउंट और सोशल नेटवर्किंग चैट्स की डिजिटल फोरेंसिक जांच कर रही है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, कांग्रेस की सरकार में श्रीवास्तव का खासा दबदबा था। उसका सीएम हाउस में बे रोक टोक आना-जाना था। स्मार्ट सिटी और एनआरडीए में 500 करोड़ का काम दिलाने के लिए उसने दिल्ली के कारोबारी रावत एसोसिएट के मालिक अशोक रावत से 15 करोड़ लिए थे। अशोक को जब ठेका नहीं मिला तो उसने पैसे वापस मांगे। श्रीवास्तव ने 17 सितंबर 2023 तक पैसे लौटाने का वादा किया। तय समय गुजरने के बाद पैसा नहीं दिया। रावत ने पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी तो उसने बेटे कंचन के खातों से 3.40 करोड़ लौटा दिए। इसके अलावा तीन-तीन करोड़ के तीन चेक दिए।श्रीवास्तव को पुलिस ने 20 जून की रात भोपाल में छापा मारकर गिरफ्तार किया था। वहां वह हुलिया बदलकर रह रहा था।


