इंदौर के पुराने एबी रोड पर प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर नगरीय प्रशासन और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में गुरुवार को जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कॉरिडोर के स्वरूप, लंबाई, चौडाई और भविष्य की आवश्यकताओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक सभी उपस्थित सदस्यों ने अपने-अपने सुझाव रखे। बैठक में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने विस्तार से अपनी बात कही। इसके साथ ही अधिकारियों को समझाइश के साथ नसीहत भी दी। मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। इसके लिए धनराशि की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों के सुझावों को गंभीरता से शामिल किया जा रहा है। बैठक में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने एलिवेटेड कॉरिडोर को समय की आवश्यकता बताते हुए इसके विस्तार पर जोर दिया। ताई बोलीं- एक-दूसरे से बोलने से कुछ नहीं होगा, इंदौर में आने वाली पीढ़ी को कम से कम तकलीफ हो। बैठक में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अधिकारियों को समझाइश के साथ नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि एलिवेटेड का मतलब है कि व्यक्ति पूरे मार्ग पर सिग्नल लैस होने की स्थिति में पहुंच सकता है। अभी गुत्थम-गुत्था की स्थिति बन रही है। इंदौर में वाहनों की संख्या हर साल बढ़ रही है और बढ़ेगी। जैसे एलआईजी से आने वाला व्यक्ति पलासिया चौराहा पार कर नीचे उतरकर फिर उसे यू टर्न की व्यवस्था हो। अच्छा कैसे बने, इस पर सुझाव दो महाजन ने कहा कि ऐसी व्यवस्था जगह-जगह सोची जा सकती है। मुझे टेक्निकल ज्यादा नहीं समझता लेकिन इस तरह से आप सोचो। हम लोग मीटिंग में इतनी देर से बैठे हैं। इस प्रोजेक्ट के सारे टेंडर भी हो चुके हैं। कॉन्ट्रैक्टर ने ऑफिस खोलने के साथ काम शुरू कर दिया है, मैं उस पर नहीं जाती। अब जो बन रहा है, वो अच्छा कैसा बने, उसमें हम क्या सुझाव दे सकते हैं, इसके लिए अधिकारियों के साथ छोटी सी कमेटी बना दो। सर्वे भी होता है, वो कितने साल का? आने वाले 15 साल का, 25 साल का होता है मुझे नहीं मालूम। 15 दिन में काम दिखना चाहिए, तभी बैठक का मतलब है महाजन ने कहा कि हमारे दिमाग में यह होता है, आने वाले 15 सालों में क्या होने वाला है। हमने बायपास बनाने के पहले रिंग रोड बना दिया था, याद है आप सबको। फिर बायपास भी बन गया और आगे भी छोटी-छोटी सड़कें बनी हैं। मैं यह सब अनुभव से कह रही हूं। प्लीज इस तरीके से सोचो। एलिवेटेड बनाओ, मगर ज्यादा से ज्यादा सुगमता और सुविधाओं से। मैं यह नहीं कहती कि इसको आगे ले जाओ। चौराहे पर लाल बत्ती कैसे हटाई जा सकती है, यह सोचो और जल्दी कैसे बने, इसके लिए कॉन्ट्रैक्टर से बात करो। अगर यह काम 15 दिनों में कर सकेंगे तो लगेगा कि आज की बैठक का कोई मतलब है। मेरी चिंता आने वाली पीढ़ी का इंदौर है महाजन ने कहा कि एक-दूसरे से बोलने से कुछ नहीं होगा, लिखित में अच्छे सुझाव देना चाहिए। मैं भी अपना सुझाव लिखित में ही दूंगी। मुझे टेक्निकल ज्यादा समझ नहीं। मुझे इतना ही समझ में आता है कि मेरे इंदौर में मेरी आने वाली पीढ़ी को कम से कम तकलीफ हो। ऐसा हम बनाकर जाए तो ज्यादा अच्छा है। वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर डेवलप हो प्रोजेक्ट सांसद शंकर लालवानी ने प्रोजेक्ट को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर डेवलप करने की बात कही। वहीं मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पब्लिक यूटिलिटी सेवाओं को समयबद्ध तरीके से स्थानांतरित करने पर जोर दिया। अगली बैठक 7 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इसमें एलिवेटेड कॉरिडोर की अंतिम रूपरेखा तय करने पर चर्चा होगी। बैठक में इंदौर उत्थान समिति के अध्यक्ष अजीत सिंह नारंग ने कहा कि हमने कई सुझाव पीडब्ल्युडी को भी दिए थे और आपको भी दे रहे हैं। उन्होंने शहर में चले रहे अन्य प्रोजेक्ट और प्रस्तावित एलिवेटेड की संभावित खामियों और सुधार को लेकर अपनी बात की। बैठक में मेट्रो संचालन की संभावनाओं और मेट्रो निर्माण के लिए आवश्यक प्रावधान रखने पर भी चर्चा हुई। बैठक में कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, विधायक महेन्द्र हार्डिया, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा, गोलू शुक्ला, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


