बुरहानपुर में रविवार को तापी लोक मंच द्वारा चिल्लोर घाट पर मां ताप्ती पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान घुटी घाट, धारनी, बोड, खारया और गोगायपुर सहित कई गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने ताप्ती नदी पर प्रस्तावित बांध के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन तापी बांध के निर्माण को रोकने के उद्देश्य से किया गया। तापी लोक मंच के अध्यक्ष डॉ. रविकुमार पटेल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की हानि किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार के लिए ताप्ती केवल एक नदी हो सकती है, लेकिन आदिवासियों के लिए यह मां समान है, और इसकी अविरल धारा से छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं होगी। अधिवक्ता जोश कल्लेली ने पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि बताया। कार्यक्रम का संचालन श्रीचंद जांभेकर ने किया, जबकि रामगोपाल मावस्कर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर तापी लोक मंच के डॉ. विनोद मालवीय, सुनील कानडे, रमेश जैसवाल, राजेंद्र पटेल, श्रीराम कास्डेकर, भूरेलाल जवारकर, रोहित जवारकर, रामसु पटेल, हरचंद भिलावेकर, हजारीलाल सेलेकर, किशन पटेल सहित कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे। यह विरोध मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के बीच ‘ताप्ती मेगा रिचार्ज स्कीम’ के तहत हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के कारण हो रहा है। लगभग 19,400 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत ताप्ती नदी पर खारिया घुटी घाट में एक बांध प्रस्तावित है। इस बांध के निर्माण से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 22 गांवों की जमीन प्रभावित होगी, जिसमें मध्य प्रदेश के 8 और महाराष्ट्र के 14 गांव शामिल हैं। हाल ही में धारणी के घुटी घाट में इस परियोजना के संबंध में हवाई सर्वेक्षण भी किया गया था। किसानों ने इसी के बाद एकजुट होकर इस योजना के तहत बनने वाले बांध का विरोध किया। हालांकि, यह पहले दिन का विरोध प्रदर्शन सांकेतिक रहा।


