भास्कर न्यूज | जालंधर स्थानीय क्षेत्र दकोहा में स्थित श्री निर्मल तख्त बाबा बुड्ढा साहिब रामदास जी के अस्थान नंबर-1, आत्मदर्शी हरिमंदर में आज 75वां विशाल वार्षिक सत्संग और बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर शुरू हुए समागम के पहले दिन सुबह 16 जनवरी से आरंभ संपट श्री सहज पाठों की अंतिम लड़ी के भोग डाले गए। दोपहर तक सजे दीवान में भाई महिंदरपाल सिंह हजूरी रागी, पावन ऐतिहासिक स्थल गुरुद्वारा छठी पातशाही बस्ती शेख के रागी जत्थे ने संगत को गुरबाणी कीर्तन श्रवण करवाया। कथावाचक ज्ञानी गुरमीत ने संगतों के साथ गुरमत विचारों की सांझ पाई तथा श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसाइटी जालंधर छावनी के जत्थे ने श्री सुखमनी साहिब जी का सामूहिक रूप से कीर्तन रूपी पाठ किया। गद्दीनशीन बाबा अमनप्रीत सिंह से आशीर्वाद भी लिया। कई श्रद्धालु पुत्र की दात प्राप्त होने पर बच्चे को मत्था टेकाने और कई अपने बच्चों को बाबा जी के हाथों दस्तार सजवाने के लिए बैंड-बाजे के साथ डेरे में पहुंचे। प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोजन की शुरुआत सुबह अत्यंत भक्तिमय वातावरण में होगी। सुबह आठ बजे से 10:00 बजे तक अमृत वेले से ही ‘आसा दी वार’ के कीर्तन होगा। सुबह 10:00 बजे से डाढी और कविशरी दरबार सजाया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध जत्थों द्वारा सिख इतिहास और वीर गाथाओं का वर्णन किया जाएगा। इस शुभ दिन पर धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए विशेष रस्में भी अदा की जाएंगी। 75वें वार्षिक उत्सव को देखते हुए मंदिर परिसर में भव्य सजावट की गई है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए लंगर और अन्य प्रबंधों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सेवादारों की टीमें तैनात की गई हैं। विद्वानों के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी की शुरुआत 22 और 23 जनवरी की मध्य रात्रि 2:29 मिनट से होगी और 23 जनवरी की रात 1:47 मिनट पर संपन्न होगी। 1. नामकरण संस्कार: नवजात बच्चों के नाम रखने की विधि पूरी की जाएगी। 2. दस्तारबंदी: बच्चों और युवाओं को दस्तार (पगड़ी) सजाने की कला और उसके महत्व से जोड़ा जाएगा। 3. दसवंध अरदास: सामूहिक रूप से दसवंध की अरदास विधिवत संपन्न की जाएगी।


