विदेशों में खुद गाड़ी चलाने का शौक अब तेजी से लोगों के बीच बढ़ रहा है और इसका सीधा असर इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की मांग पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो यह रुझान प्रतिशत के रूप में भी साफ नजर आता है। साल 2023 के मुकाबले साल 2024 में इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या में 3.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि साल 2024 के मुकाबले साल 2025 में यह बढ़ोतरी और तेज होकर 17.21 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं अगर सीधे साल 2023 और 2025 की तुलना करें तो कुल 21.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि बीते दो सालों में विदेशों में ड्राइविंग को लेकर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। तीन साल में 383 लोगों ने बनवाया लाइसेंस परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन सालों में कुल 383 लोगों ने इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया है। साल 2023 में जिले से 118 लोगों ने यह लाइसेंस लिया था। इसके अगले साल यानी 2024 में यह संख्या बढ़कर 122 हो गई। वहीं साल 2025 में इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या और बढ़ते हुए 143 तक पहुंच गई। हर साल दर्ज हो रही यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि अब लोग विदेश यात्रा के दौरान टैक्सी या ड्राइवर पर निर्भर रहने के बजाय खुद गाड़ी चलाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। विदेशों में ड्राइवर महंगे, कार रेंट सस्ती प्रादेशिक परिवहन अधिकारी नेमीचंद पारीक के अनुसार विदेशों में कार या कैब किराए पर लेना तुलनात्मक रूप से सस्ता पड़ता है, लेकिन वहां ड्राइवर की सेवाएं काफी महंगी होती हैं। ऐसे में भारतीय पर्यटक खर्च बचाने के लिए खुद ड्राइविंग करना बेहतर विकल्प मानते हैं। खासकर परिवार या दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले लोग कार रेंट पर लेकर अपनी सुविधा के अनुसार घूमना पसंद करते हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रहा है। खुद ड्राइविंग से मिलती है आजादी अधिकारियों का मानना है कि विदेशों में खुद गाड़ी चलाने से पर्यटकों को ज्यादा आजादी मिलती है। वे अपनी मर्जी से जहां चाहें वहां रुक सकते हैं, समय की पाबंदी से बच सकते हैं और यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकते हैं। कई लोग बताते हैं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट या टैक्सी के मुकाबले खुद की गाड़ी से घूमना ज्यादा सुविधाजनक होता है। इसी कारण अब छोटे शहरों से भी लोग इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आगे आ रहे हैं। क्या होता है इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट, जिसे आईडीपी कहा जाता है, भारतीय नागरिकों को विदेशों में गाड़ी चलाने की अनुमति देता है। यह लाइसेंस एक साल की अवधि के लिए जारी किया जाता है। आरटीओ नेमीचंद पारीक ने बताया कि आईडीपी को रिन्यू नहीं किया जा सकता। यानी एक साल की वैधता खत्म होने के बाद अगर किसी व्यक्ति को फिर से विदेश में ड्राइविंग करनी हो, तो उसे भारत आकर दोबारा नया इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पड़ता है। यह लाइसेंस केवल प्रादेशिक परिवहन कार्यालय से ही जारी किया जाता है। ऑनलाइन आवेदन, लेकिन डॉक्यूमेंट्स ओरिजिनल जरूरी इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। हालांकि आवेदन के समय सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की ओरिजिनल कॉपी दिखाना जरूरी होता है। इसमें ओरिजिनल वीजा, पासपोर्ट, भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और यात्रा से जुड़े टिकट शामिल हैं। यह सभी डॉक्यूमेंट्स के साथ पर्यटक को RTO के सामने पेश होना पड़ता है। आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि सभी डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है, जिससे किसी तरह की गलती या फर्जीवाड़े की संभावना न रहे। एक ही दिन में लाइसेंस देने की कोशिश आरटीओ कार्यालय की ओर से यह प्रयास किया जाता है कि इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में ज्यादा समय न लगे। नेमीचंद पारीक के अनुसार कई लोग अन्य जिलों से प्रादेशिक कार्यालय आते हैं। अगर उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ें तो उन्हें परेशानी होती है। इसी वजह से कोशिश रहती है कि सभी डॉक्यूमेंट्स सही होने पर उसी दिन आईडीपी बनाकर दे दिया जाए, ताकि यात्रियों को समय पर राहत मिल सके। छोटे शहरों से भी बढ़ रही भागीदारी पहले इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस को बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों से भी लोग इसे बनवाने आ रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। अब विदेश जाना सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वहां की लाइफस्टाइल को करीब से देखने और अनुभव करने की इच्छा भी बढ़ी है। भविष्य में और बढ़ सकती है संख्या परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले सालों में इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। विदेश यात्रा, शिक्षा, नौकरी और पर्यटन के बढ़ते अवसरों के साथ लोग ज्यादा आत्मनिर्भर तरीके से यात्रा करना चाहते हैं। ऐसे में इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस एक जरूरी डॉक्यूमेंट्स के रूप में अपनी अहमियत लगातार बढ़ा रहा है। लगातार बढ़ते आंकड़े यह साफ बताते हैं कि विदेशों में खुद ड्राइविंग करना अब एक नया और लोकप्रिय ट्रेंड बन चुका है।


