तीन साल से बंद पड़ा सहकारी बैंक, किसान परेशान

पटना | सहकारी बैंक भवन का निर्माण तीन साल पहले 35 लाख रुपए की लागत से हुआ था। अब तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका है। बैंक शुरू होता तो पटना तहसील के 84 गांवों के करीब 10 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलता। लेकिन प्रशासनिक अड़चनों और आरबीआई की अनुमति न मिलने से संचालन शुरू नहीं हो पाया है। किसान लंबे समय से बैंक खुलने का इंतजार कर रहे हैं। अभी उन्हें बैकुंठपुर जाकर बैंकिंग सेवाएं लेनी पड़ती हैं। वहां तक पहुंचने के लिए 15 से 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बैंक में लंबी कतारों में लगना पड़ता है। इससे समय बर्बाद होता है। खेती के काम पर असर पड़ता है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने किसानों की जरूरत और बढ़ती आबादी को देखते हुए इस बैंक भवन का निर्माण कराया था। पटना जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, तरगंवा, सरभोका, गीरजापुर और छिंदिया के अंतर्गत आने वाले गांवों के पंजीकृत किसानों की संख्या को देखते हुए बैंक की जरूरत और बढ़ गई थी। तीन साल बाद भी यह भवन खंडहर बन चुका है।

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